Wednesday, 6 December 2017

दलित से शादी करने पर 2.5 लाख रुपये देगी केंद्र सरकार, ये हैं शर्तें...



नई दिल्ली : इंटर कास्ट मैरिज को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने 5 लाख रुपये की सालाना आय की अधिकतम सीमा को खत्म कर दिया है। केंद्र के इस फैसले से अंतर जातीय विवाह करने वाले सभी आय वर्ग के लोगों को 'डॉ. अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटरकास्ट मैरिज' योजना का लाभ मिल सकेगा।

इस स्कीम के तहत इंटर कास्ट मैरिज करने वाले जोड़े को सरकार 2।5 लाख रुपये देगी, जोड़े में से लड़के या लड़की किसी एक को दलित होना चाहिए। बता दें कि इस योजना का लाभ पहले 5 लाख रुपये से कम की सालाना आय वाले जोड़े को ही मिलती थी।

केंद्र सरकार ने ज्यादा से ज्यादा इंटर कास्ट मैरिज को बढ़ावा देने के लिए इस शर्त को हटा दिया है, यानि अब 5 लाख रुपये से ज्यादा की सालाना आय वाले जोड़े भी इस योजना का फायदा उठा सकेंगे। साल 2013 में शुरू हुई 'डॉ. अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटरकास्ट मैरिज' योजना के तहत केंद्र सरकार का लक्ष्य हर साल कम से कम 500 अंतर जातीय विवाह करने वाले जोड़े को योजना के तहत पुरस्कृत करने का लक्ष्य रखा गया था।

नियमों के मुताबिक 2.5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि पाने के लिए जोड़े की वार्षिक आय 5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए थी। केंद्र सरकार की यह योजना सामाजिक स्तर एक साहसिक फैसला थी। साथ ही 2।5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि से जोड़े को अपनी शादी के शुरुआती दिनों में जिंदगी को पटरी पर लाने में भी मदद मिलती।

हालांकि इस योजना में एक और खास शर्त थी और वे कि अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़े की पहली शादी होनी चाहिए। साथ ही शादी को हिंदू मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर भी होना चाहिए। योजना का लाभ लेने के लिए जोड़े को अपनी शादी के एक साल के भीतर ही इसका प्रस्ताव सरकार के पास सौंपना होगा।

अपने ताजा आदेश में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि इस योजना के लिए आय के आधार पर कोई सीमा नहीं होनी चाहिए। हालांकि मंत्रालय ने आधार नंबर को अनिवार्य कर दिया है। जोड़े को अब अपना आधार नंबर और उससे जुड़ा बैंक अकाउंट भी देना होगा।

मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि कई राज्यों में इस तरह की योजनाएं चल रही हैं, लेकिन उनमें आय के आधार पर कोई सीमा नहीं है। लिहाजा केंद्र सरकार ने भी इसे हटाने का फैसला किया है। हालांकि शुरू होने के बाद से ही यह योजना बेहतर तरीके से लागू नहीं हो पाई है। सालाना 500 के लक्ष्य को भी सरकार हासिल नहीं कर पाई है। 2014-15 में सिर्फ 5 जोड़ों को लाभ मिल पाया, तो 2015-16 में केवल 72 लोगों को इसका लाभ मिला। 


बता दें कि इस साल 522 जोड़ों ने इसके लिए अप्लाई किया था, लेकिन केवल 72 को योग्य पाया गया। 2016-17 में 736 आवेदकों में से 45 को मंत्रालय ने सही ठहराया। तो इस साल अब तक केवल 409 प्रस्ताव मंत्रालय को मिले हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने इनमें से केवल 74 जोड़ों को योग्य पाया है।
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Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

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1 comment :

  1. Sir, dalit ladki se sadi karne pr aarkshan milega kya???

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