Wednesday, 8 November 2017

8 नवम्बर : जानिये नोटबंदी फायदे और नुकसान



नई दिल्ली : जब से पुराने नोटों को बंद किया गया है तब से एक ही सवाल बना हुआ है कि इससे लाभ अधिक हुए या नुकसान? नोटबंदी का मकसद बताया गया था- कालाधन, भ्रष्टाचार, नकली नोट और टेरर फंडिंग को खत्म करना।

इन चार मोर्चों पर नोटबंदी कितनी कामयाब रही, इस पर अभी भी बहस जारी है। सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ डिजिटलाइजेशन और कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए नोटबंदी लागू की गई थी? अगर ये ही मकसद थे तो नोटबंदी की जरूरत ही क्‍या थी? आज हम नोटबंदी के इन्‍हीं फायदों और नुकसान की चीर-फाड़ कर रहे हैं...

8 नवंबर को प्रधानमंत्री ने 50 दिनों का रोडमैप दिया था। लेकिन वक्त बीतता गया, नई-नई चुनौतियां सामने आती गईं। सरकार नोटबंदी के नियमों में फेरबदल करती रही और नोटबंदी का गोलपोस्ट यानी मकसद बदलता चला गया। लोगों को बैंक और एटीएम की कतारों से मुक्त होने में कई महीने लग गए, असंगठित क्षेत्र में कारोबार प्रभावित हुआ, नौकरियां गईं।

कैश पर चलने वाली ग्रामीण इकोनॉमी समेत अन्‍य सेक्‍टर को तगड़ा झटका लगा। इकोनॉमी का असंगठित सेक्‍टर सबसे अधिक प्रभावित हुआ। इस सेक्‍टर में 15 लाख नौकरियां खत्म होने का अनुमान है। नोटबंदी से रियल एस्टेट सेक्टर का 40 फीसदी तक कारोबार कम हो गया। निजी निवेश का प्रवाह रुका जिसके कारण वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5.7 फीसदी तक फिसली। वहीं निजी उपभोग में भी गिरावट देखने को मिली। संगठित क्षेत्र में भी कई महीनों तक असर रहा।

बैंकिंग और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी जैसे कुछ सेक्टर को इससे जरूर कुछ फायदा हुआ। एक रिपोर्ट के मुताबिक हवाला में 50 फीसदी कमी आई है। बैंकों में नकदी बढ़ी और नए अकाउंट खोले गए। नोटबंदी के तुरंत बाद डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ा। केवल दिसंबर 2016 में डिजिटल ट्रांजैक्शन 300 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली थी।

इस साल अगस्त-सितंबर में 13.5 फीसदी की ग्रोथ देखी गई। सितंबर में 124.69 लाख करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ है, यानी यूपीआई से ट्रांजैक्शन में 10 गुना वृद्धि हुई। इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश बढ़ा। इक्विटी म्युचुअल फंड 0.6 डॉलर से बढ़कर 4 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। इसी तरह टैक्स रेवेन्यू 18 फीसदी बढ़कर 17.1 लाख करोड़ रुपये हो गया।

वहीँ रिजर्व बैंक का कहना है कि 99 फीसदी पुराने नोट बदल लिए गए। इससे कैश में काले धन की सरकारी धारणा पर सवाल उठे हैं। हालांकि सरकार का दावा है कि ब्लैक मनी का सारा हिसाब बैकों के पास है और सरकार एक-एक पैसे का हिसाब देगी।


सरकार का यह भी कहना है कि काला धन रखने वालों को पकड़ने में समय लगेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि 18 लाख से ज्यादा लोग शक के घेरे में है, जिनकी आय घोषित संपत्ति से ज्यादा है, जबकि 1.75 लाख करोड़ जांच के दायरे में हैं और सरकार ने अब तक 800 करोड़ रुपये की बेमानी संपत्ति जब्त की है। विपक्ष से तो आलोचना की ही उम्मीद की जा सकती है, लेकिन सवाल उठता है कि नोटबंदी के साल भर बाद भी क्या सरकार के पास दिखाने के लिए कोई ठोस नतीजा है?
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Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

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