Saturday, 30 September 2017

विजयादशमी पर बोले भागवत - 70 साल में पहली बार महसूस हो रही आजादी!

नई दिल्ली : आज देशभर में दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) मुख्यालय में मोहन भागवत ने शिरकत की और विजयादशमी के बारे में बताते हुए हिंदुस्तान और हिंदुओं के गौरव को बयां किया। इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद हैं।



# देश में हर हाथ को काम मिलना चाहिए। स्वरोजगार. लघु, मध्यम और कुटीर उद्योग से सबसे ज्यादा काम मिलता है,विश्व के आर्थिक भूचालों का असर भारत पर सबसे कम हुआ। ऐसा छोटे व्यापारों की वजह से हुआ।

# लोगों के लाभ के लिए अनेक योजनाएं चलीं। साहस करने में भी शासन कम नहीं है। लेकिन जो किया है उसका हो क्या रहा है, इसे समझना चाहिए

# केरल और बंगाल के समाचार किसी से छुपे नहीं हैं। वहां जिहादी और राष्ट्र विरोधी ताकतें अपना खेल कर रही हैं। शासन प्रशासन वहां का वैसा ध्यान नहीं देता है। वह भी उन्हीं का साथ देता है

# इन लोगों को अगर आश्रय दिया गया तो वे सुरक्षा के लिए चुनौती बनेंगे। इस देश से उनका नाता क्या है? मानवता तो ठीक है लेकिन इसके अधीन होकर कोई खुद को समाप्त तो नहीं कर सकता

# कश्मीर घाटी में शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं जैसी चाहिए वैसी नहीं पहुंच रही है। शासन-प्रशासन और समाज के समन्वयित प्रयास से राष्ट्र के शत्रुओं से लड़ाई जारी रखते हुए सामान्य जनता को भारत की अत्मीयता का अनुभव कराना चाहिए

# कश्मीर में देश विरोधी ताकतों की आर्थिक रूप से कमर टूट गई है

# सीमाओं पर सुरक्षा को चुनौती देने वालों को हमने जवाब दिया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उन्हें जवाब मिला है

# समाज में यही चर्चा है कि ऐसा काम हो रहा है और यह भी होना चाहिए, ऐसी चर्चा कहीं नहीं है कि काम नहीं हो रहा है

# सारी दुनिया में हमारी प्रतिष्ठा ऊंची हुई है। भारत पहले भी था, हम सब भी थे लेकिन भारत को गंभीरतापूर्वक देखना और भारत में दखल देने से पहले 10 बार विचार करना। यह बातें केवल आज सामने आई हैं

# हम 70 साल से स्वतंत्र हैं फिर भी पहली बार अहसास हो रहा है कि भारत की प्रतिष्ठा बढ़ रही है

# RSS प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में हुए #ElphinstoneBridgeTragedy पर दुख जताया

# शंकट में आगे बढ़कर चलना ही जिंदगी है।

# मोहन भागवत ने कहा- हम सभी उन परिवारों के लिए सहानुभूति है जो मुंबई में कल की घटना में मारे गए और घायल हो गए।

# मोहन भागवत ने मुंबई के परेल में मारे गए लोगों को दी श्रद्धांजलि


# खास बात है कि विजयादशमी के मौके पर ही 27 सितंबर, 1925 को आरएसएस की स्थापना की गई थी। स्थापना मोहिते के बाड़े नामक स्थान पर केशवराव बलिराम हेडगोवर के हाथों हुई थी। शुरुआत में आरएसएस की शाखा में 5 लोग थे और आज इसकी 50 हजार से ज्यादा शांखाएं हैं और लाखों लोग इससे जुड़े हुए हैं।
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Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

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