Sunday, 20 August 2017

इस छोटे से देश ने चीन को मारा 'तमाचा', बोला - हम तुम्हारे गुलाम नहीं!

नई दिल्ली : भारत से साथ डोकलाम में चल रहे विवाद के बीच चीन के घमंड को एक छोटे से दक्षिण अफ्रीकी देश से करारा जवाब मिला है। अपनी हीरों की खानों के लिए मशहूर दक्षिण अफ्रीकी देश बोत्सवाना चीन की बार-बार की धौंस से तंग आकर तब आग बबूला हो उठा है।



बोत्सवाना के राष्ट्रपति इयान खामा ने कूटनीतिक बातचीत के दौरान इस्तेमाल ना की जाने वाली ऐसे कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया है जिसने चीन को आइना दिखाने का काम किया है। दरअसल चीन बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के प्रस्तावित दौरे के लेकर बोत्सवाना को राजनीतिक और कूटनीतिक परिणाम भुगतने की धमकी दे रहा था।

बोत्सवाना के राष्ट्रीय अखबार बोत्सवाना गार्जियन के मुताबिक बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा 17 से 19 अगस्त तक बोत्सवाना की राजधानी गेबोरोनी के दौरे पर जाने वाले थे। अखबार के मुताबिक दलाई लामा का ये निजी दौरा था और वे यहां पर आध्यमिकता, विज्ञान और मानवता पर प्रवचन देने वाले थे।

लेकिन चीन इस दौरे का विरोध कर रहा था। चीन ने बोत्सवाना को दलाई लामा की आगवानी ना करने की चेतावनी दे डाली थी। लेकिन अपने आंतरिक मामलों में चीन के दखल को देख इयान खामा चिढ़ गये और उन्होंने चीन को दो टूक कहा कि उनका देश चीन का गुलाम नहीं है।

बोत्सवाना गार्जियन को दिये इंटरव्यू में राष्ट्रपति इयान खामा ने कहा, ‘ उन्होंने तरह तरह की धमकियां दी, चीन अपना राजदूत वापस बुला लेगा, दोनों देश के बीच रिश्ते खराब हो जाएंगे, चीन दूसरे अफ्रीकी देशों की मदद से बोत्सवाना को अलग-थलग कर देगा।बावजूद इसके बोत्सवना चीन के दबाव में नहीं झुका।

जब तबियत खराब होने की वजह से दलाई लामा का दौरा रद्द होने की खबर आई तो बोत्सवाना के राष्ट्रपति ने कहा, ‘ हम उम्मीद करते हैं कि उनकी सेहत जल्द ठीक होगी और एक बार तंदुरुस्त होने के बाद निश्चित रुप से उनका बोत्सवाना में स्वागत है, वे यहां आएं और घुमें।’ 

उन्होंने कहा कि बोत्सवाना के राष्ट्रपति आपको ये बताना चाहते हैं कि वे चीन की धमकियों से डरते नहीं हैं, और बोत्सवाना चीन की कॉलोनी नहीं है।

बता दें कि तिब्बत पर दलाई लामा के रुख को लेकर चीन उनका विरोध करता रहा है। भारत-चीन के बीच विवाद की भी एक बड़ी वजह भारत द्वारा दलाई लामा को दिया राजनीतिक शरण है। बता दें कि इससे पहले भी बोत्सवाना गार्जियन ने तिब्बत टूरिज्म के बारे में एक शानदार लेख छापा।


चीन पर बोत्सवाना के राष्ट्रपति का रुख देखकर वहां की मीडिया गदगद है। बोत्सवाना की मीडिया मानती है कि उनके देश ने संदेश दे दिया है कि वे चीनी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और उनके देश को चीन की जरूरत नहीं है।
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Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

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