Saturday, 12 August 2017

गोरखपुर के मासूमों के लिए डॉ. कफील बने ‘फरिश्ता’, अपने पैसों से ऑक्सीजन खरीदकर बचाई जाने

नई दिल्ली : डॉक्टरों को दुनिया में भगवान का दर्जा हासिल है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला गोरखपुर बीआरडी हॉस्पिटल में जब ऑक्सीजन कमी पड़ी तो डॉ. कफील उन बच्चों के लिए फ़रिश्ता बनकर हॉस्पिटल जा पहुंचे और अपनी लगातार कोशिशों के बदलौत उन्होंने कुछ बच्चों तक ऑक्सीजन की सप्लाई करवाई।



रात के दो बज रहे थे। वार्ड के कर्मचारियों ने प्रभारी व बाल रोग स्पेशलिस्ट डॉ कफील अहमद को जानकारी अगले एक घंटे में ऑक्सीजन खत्म हो जायेगा। डॉ कफील की नींद उड़ गई, वो बेचैन होते हुए अपने कुछ डॉक्टर साथियों के अस्पताल पहुचं गये, वहां से ऑक्सीजन जंबो सिलिंडर लेकर सीधे बीआरडी पहंचे , सिलेंडर की मदद से बालरोग विभाग में करीब 15 मिनट तक ऑक्सीजन की सप्लाई हो सकी।

मगर सुबह साढ़े सात बजे ऑक्सीजन ख़त्म होने पर एक बार फिर वार्ड में हडकंप मच गई। मरीज तड़प रहे थे तीमारदार मायूस होने लगे, वार्ड में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर और कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ती जा रही थी।

इन्ही सबके बीच ऑक्सीजन सिलेंडर की खेप आने में करीब घंटे का वक़्त था, डॉ कफील ही हर मोर्चे पर सारे हालातों पर सबका सहारा बने हुए थे। वार्ड में घूम-घूम कर बेबास दिल धड़कन धीरे पड़ता देख जूनियर डॉक्टरों को एम्बु बैग चलाने का आदेश दिया।

ऑक्सीजन की कमी देख उन्होंने जिले में आधा दर्जन ऑक्सीजन सप्लायरों से फोन पर बात की। और फिर डॉ को पहली कामयाबी तब मिली जब मयूर ऑक्सीजन सिलिंडरों रिफिल करने को राज़ी हो गया।

शर्त ये थी कि पेमेंट कैश में मिले।डॉ कफील ने बिना देरी किये अस्पताल के एक कर्मचारी को अपना एटीएम दिया और पैसे देकर फ़ौरन पेमेंट करवाए।फैजाबाद से ट्रक से आ रहे ऑक्सीजन की गाड़ियों का डीज़ल का खर्च तुरंत अपने जेब से निकल कर देख भेजा।

कफील का मतलब मददगार होता है और शुक्रवार को हुई इस घटना के बाद डॉ कफील अहमद ने अपने नाम का सही मतलब सही साबित करते नज़र आये।


बता दें कि गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में पिछले 48 घंटों में 30 मासूमों की मौत की खबर विचलित करने वाली है, वो भी सिर्फ इसलिए कि सप्लायर का लाखों का बकाया था और उसने सप्लाई बंद कर दिया।
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Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

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