Wednesday, 23 August 2017

क्या तीन तलाक के बाद खतना भी बंद होना चाहिए?, पढ़े कैसे होता है खतना

नई दिल्ली : तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब मुस्लिम महिलाएं खतने को लेकर भी आवाज उठा रही हैं। बोहरा मुस्लिम समुदाय की मासूमा रानाल्वी ने पीएम के नाम एक खुला ख़त लिखकर इस कुप्रथा को रोकने की मांग की है।



गौरतलब है कि मासूमा लिखती हैं-  बोहरा समुदाय में सालों से 'ख़तना' या 'ख़फ्ज़' प्रथा का पालन किया जा रहा है। बोहरा, शिया मुस्लिम हैं। मेरे समुदाय में आज भी छोटी बच्चियों के साथ क्या होता है। जैसे ही कोई बच्ची 7 साल की हो जाती है, उसकी मां या दादीमां उसे एक दाई या लोकल डॉक्टर के पास ले जाती हैं।

बच्ची को ये नहीं बताया जाता कि उसे कहां ले जाया जा रहा है या उसके साथ क्या होने वाला है। दाई या आया या वो डॉक्टर उसके प्राइवेट अंग को काट देते हैं। इस प्रथा का दर्द ताउम्र के लिए उस बच्ची के साथ रह जाता है। इस प्रथा का एकमात्र उद्देश्य है, बच्ची या महिला के यौन इच्छाओं को दबाना।

बता दें कि यूएन ने 6 फरवरी को महिलाओं के खतना के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया है। इस साल का थीम साल 2030 तक एफजीएम के उन्मूलन के जरिए नए वैश्विक लक्ष्यों को पानारखा गया है। दुनियाभर में हर साल करीब 20 करोड़ बच्चियों या लड़कियों का खतना होता है। इनमें से आधे से ज्यादा सिर्फ तीन देशों में हैं, मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया।

भारत में इसे मानने वाले दाऊदी बोहरा मजबूत व्यापारी मुस्लिम समुदाय है। करीब 10 लाख लोग मुंबई और आसपास के इलाकों में रहते हैं। दक्षिणी मुंबई के मालाबार हिल इलाके में इनका मुख्यालय हैं। यहां भारत के कुछ सबसे अमीर लोग रहते हैं। यहीं सैयदना बैठते हैं, बोहरा धर्मगुरु।

पीएम को खुला खत लिखने वाली रानालवी कहती हैं, "वे हमेशा कहते हैं, छोटा सा कट है, बस मामूली सा कट है। छोटी सी बात है। लेकिन ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं जहां ये छोटे से कट खतरनाक साबित हुए हैं।"

गौरतलब है कि इस खतने की वजह से बहुत ज्यादा खून बहता है और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। इनमें सिस्ट बनना, संक्रमण, बांझपन तो आम हैं ही, बच्चे के जन्म के समय जटिलताएं बढ़ जाती हैं और इसमें नवजात की मृत्यु का जोखिम बढ़ना भी शामिल है।

एक इंटरव्यू में रानालवी में बताया कि जब वह 7 साल की थीं तो उनकी मां ने उनसे टॉफी का वादा किया। उन्हें एक घर के पीछे के रास्ते से एक अंधेरे से कमरे में ले जाया गया। उन्हें कसकर पकड़ लिया गया। और फिर उन्हें बस असहनीय दर्द ही याद है।

वह घर आते हुए पूरा रास्ता रोती रही थीं। उन्हें अगले 20-25 साल तक समझ नहीं आया कि उनके साथ हुआ क्या था। फिर उन्होंने महिला खतने के बारे में पढ़ा। भारत में इसके बारे में कोई कानून नहीं है।


2015 में बोहरा समुदाय की कुछ महिलाओं ने एकजुट होकर 'WeSpeakOut On FGM' नाम से एक कैंपेन शुरू किया और यहां हमने आपस में अपनी दुख और कहानियां एक-दूसरे से कही। हमने Changeorg पर एक कैंपन की शुरुआत की थी।इसे बंद करने के समर्थन में हमें 9 हजार से ज़्यादा साइन मिल गए हैं।
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Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

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