Thursday, 27 July 2017

क्या अब इन मोहतरमा पर भी होगी करवाई?

नई दिल्ली : बिहार के डिप्टी सीएम बने सुशील मोदी भले ही तेजस्वी यादव पर गंभीर आरोप लगाकर इस्तीफा मांग रहे हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि उनकी पत्नी की प्रोफेसर डिग्री ही फर्जी है।



फर्क इंडिया डॉट org की रिपोर्ट के मुताबिक डिग्रियों के फर्जीवाड़े के खेल में अभी तक दूसरों पर हमला करती रही भाजपा पर अब इसकी आंच आ गई है। बिहार के स्वास्‍थ्य मंत्री रामधनी ‌स‌िंह ने ही ये आरोप लगाया है। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार वरिष्‍ठ जेडीयू नेता और बिहार सरकार में मंत्री रामधनी सिंह ने डिप्टी सीएम सुशील मोदी की पत्‍नी पर फर्जी डिग्रियों के जरिए गर्वनमेंट डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर की नौकरी पाने का आरोप लगाया है।

डिल्टी सीएम सुशील मोदी की पत्‍नी जेसू जार्ज पटना के गर्वनमेंट डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर हैं। सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्होंने फर्जी डिग्री के जरिए कॉलेज में नौकरी पाई और प्रोफेसर के पद तक पहुंची।

कैसे हुआ खुलासा?

असल में ये सारा विवाद उस समय शुरू हुआ जब बिहार के स्वास्‍थ्य मंत्री रामधनी सिंह की बेटी को फर्जी कागजातों के जरिए सरकारी अस्पताल में ग्रेड 3 की नौकरी पाने के आरोपों के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।

बीते दिनों उन पर यह आरोप भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने लगाए थे। इसके बाद भाजपा नेता सुशील मोदी ने भी स्वास्‍थ्य मंत्री से रामधनी सिंह के इस्तीफा देने की मांग की ‌थी।

इसके बाद रामधनी सिंह ने पलटवार करते हुए सुशील मोदी की पत्नी जेसू जार्ज पर ही फर्जी डिग्री से नौकरी पाने के आरोप लगा दिए। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही इस संबंध में सबूत वह मीडिया तक पहुंचाएंगे।

सासाराम में मीडिया से बात करते हुए रामधनी सिंह ने बताया कि मोदी की पत्नी का मामला पहले से ही विजीलेंस के पास है, जो 90 के दशक के लेक्चरर घोटाले की जांच कर रही है।

सिंह ने दावा किया क‌ि वो जल्द ही सुशील मोदी का असली चेहरा सबके सामने बेनकाब करेंगे, जो खुद को एक ईमानदार आदमी होने का दावा करते हैं।

उन्होंने बताया कि विजीलेंस के सूत्रों के अनुसार मोदी की पत्‍नी ने नौकरी पाने के लिए फर्जी कागजातों का सहारा लिया। मामले की जांच में पहले ही काफी देरी हो चुकी है, उनकी नियुक्ति तब हुई थी जब वो बिहार में विपक्ष के नेता थे।

विजीलेंस जांच से घिरी हैं मोदी की पत्नी :-

साल 2002 में विजीलेंस के पुलिस अधीक्षक अजय कुमार वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष यू पंजैर को लिखा था कि जब वह जार्ज की नियुक्ति के फर्जी दस्तावेजों को साबित करने की कगार पर थे, तब उन्हें हटा लिया गया।
जेसू जार्ज का नाम उन लोगों में शामिल था जिनकी विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग से ग्रांट पाने वाले कॉलेजों में फर्जी नियुक्तियों की जांच की जा रही थी। उनके राजा राम मोहन राय कॉलेज ऑफ एजुकेशन से मिले अनुभव प्रमाण पत्र को कथित तौर पर फर्जी बताया गया था।


वर्मा के पत्र के अनुसार जिन सर्टिफिकेट से उनका कॉलेज में शिक्षण का अनुभव दिखाया गया है, वो 1988 से 1992 तक का है जबकि बीएड कॉलेज 1987 से 1989 तक संचालित हुआ।
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Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

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