Thursday, 9 April 2020

इंसान ने इन गलतियों से पैदा की कोरोना महामारी, सामने आई चौकाने वाली बातें


नई दिल्ली : दुनिया भर में कोरोना वायरस की महामारी फैल रही है तो इसके लिए इंसान खुद ही जिम्मेदार हैं। एक स्टडी में दावा किया गया है कि शिकार, खेती और बड़ी संख्या में लोगों के शहरों की तरफ पलायन की वजह से जैव-विविधता में बड़े पैमाने पर कमी आई है और लोगों का वन्य जीवों के साथ सीधा संपर्क बढ़ता गया। इन वजहों से ही Covid-19 जैसे वायरस का खतरा बढ़ा।



स्टडी में इस बात की संभावना जताई गई है कि कोरोना वायरस महामारी वन्य जीवों के साथ मनुष्यों के ज्यादा संपर्क बढ़ने की वजह से फैली है। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने इस बात का पता लगाया है कि कौन से जानवर मनुष्यों में ज्यादा वायरस फैलाते हैं।

कई सालों से 142 वायरस जानवरों से मनुष्यों में फैल रहे हैं। वैज्ञानिकों ने इन वायरसों का अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature) की खतरे वाली प्रजातियों की लाल सूची से मिलान किया।

गाय, भेड़, कुत्ते और बकरियों जैसे पालतू जानवरों से मनुष्यों में सबसे अधिक वायरस जाते हैं। वो जंगली जानवर, जो मनुष्यों के वातावरण में अच्छे से ढल जाते हैं, वो भी लोगों में वायरस को फैलाने का काम करते हैं।

चूहे, गिलहरी, चमगादड़ और सभी स्तनधारी जीव अक्सर लोगों के बीच, घरों और खेतों के करीब रहते हैं। ये सब एकसाथ मिलकर करीब 70 फीसदी वायरस फैलाते हैं। सार्स, निपाह, मारबर्ग और इबोला जैसी बीमारियां अकेले चमगादड़ों से ही फैल गई थीं।

लंदन की रॉयल सोसाइटी बी की पत्रिका में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार संक्रामक रोग फैलने का सबसे ज्यादा खतरा विलुप्त हो रहे उन जंगली जानवरों से है जिनकी आबादी शिकार, वन्य जीव व्यापार और कम होते जंगलों की वजह से काफी हद तक कम हो गई है।

इस स्टडी में कहा गया है, 'जैव विविधता वाले क्षेत्रों में अतिक्रमण की वजह से मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच नए संपर्क स्थापित हो रहे हैं जिसकी वजह से संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। स्तनधारी जानवरों और चमगादड़ों की कुछ प्रजातियों से पशुजन्य वायरस फैलने की ज्यादा संभावना होती है।

स्टडी की प्रमुख लेखक और वन हेल्थ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर क्रेउडर जॉनसन ने कहा, 'जानवरों से वायरस फैलने की सीधी वजह वन्य जीवों और उनके निवास स्थान से जुड़े हमारे काम हैं। अब परिणाम यह है कि वे अपने वायरस हम तक फैला रहे हैं। ये चीजें जानवरों के अस्तित्व को खतरे में डालने के साथ संक्रमण के भी खतरे को बढ़ा रही हैं।'

क्रेउडर जॉनसन ने कहा, 'ये चीजें दुर्भाग्यपूर्ण हैं और हम अपने लिए कई मुश्किलें पैदा कर रहे हैं। हमें वास्तव में इस चीज को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है कि वन्य जीवों और मनुष्यों के बीच किस तरह से सही तालमेल बिठाया जा सके। जाहिर है कि हम इस तरह की महामारी नहीं चाहते हैं। हमें वन्य जीवों के साथ मिलजुलकर रहने के और तरीके खोजने की जरूरत है, क्योंकि उनके पास वायरस की कोई कमी नहीं है।'

इसके अलावा, दुनिया भर के 200 से अधिक वन्य जीव संगठनों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को पत्र लिखकर कई देशों पर वन्य जीवों के अरबों रुपये के व्यापार को लेकर कई तरह की सावधानी बरतने को कहा है। इसमें सभी जीवित वन्य जीव के बाजारों और पारंपरिक चिकित्सा में इनके इस्तेमाल पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की भी सिफारिश की गई है।

इस पत्र के अनुसार, Covid-19 महामारी, चीन के वेट मार्केट से फैली है जहां हर तरह के पशुओं का मांस मिलता है। जानवरों और लोगों के बीच इतनी करीबी होने की वजह से यह मनुष्यों में फैल गया। इंटरनेशनल वेलफेयर फॉर एनिमल वेलफेयर, जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन और पेटा जैसे समूहों का भी कहना है कि वैश्विक स्तर पर वन्य जीव बाजारों पर प्रतिबंध से कई तरह की बीमारियों को फैलने से रोका जा सकता है। इन संगठनों का कहना है कि इबोला, मेर्स, एचआईवी, ट्यूबरक्लोसिस, रेबीज और लेप्टोस्पायरोसिस जैसे पशुजन्य रोगों से हर साल 2 अरब से ज्यादा लोग बीमार पड़ते हैं और 20 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है।


नई दिल्ली : दुनिया भर में कोरोना वायरस की महामारी फैल रही है तो इसके लिए इंसान खुद ही जिम्मेदार हैं। एक स्टडी में दावा किया गया है कि शिकार, खेती और बड़ी संख्या में लोगों के शहरों की तरफ पलायन की वजह से जैव-विविधता में बड़े पैमाने पर कमी आई है और लोगों का वन्य जीवों के साथ सीधा संपर्क बढ़ता गया। इन वजहों से ही Covid-19 जैसे वायरस का खतरा बढ़ा।



स्टडी में इस बात की संभावना जताई गई है कि कोरोना वायरस महामारी वन्य जीवों के साथ मनुष्यों के ज्यादा संपर्क बढ़ने की वजह से फैली है। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने इस बात का पता लगाया है कि कौन से जानवर मनुष्यों में ज्यादा वायरस फैलाते हैं।

कई सालों से 142 वायरस जानवरों से मनुष्यों में फैल रहे हैं। वैज्ञानिकों ने इन वायरसों का अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature) की खतरे वाली प्रजातियों की लाल सूची से मिलान किया।

गाय, भेड़, कुत्ते और बकरियों जैसे पालतू जानवरों से मनुष्यों में सबसे अधिक वायरस जाते हैं। वो जंगली जानवर, जो मनुष्यों के वातावरण में अच्छे से ढल जाते हैं, वो भी लोगों में वायरस को फैलाने का काम करते हैं।

चूहे, गिलहरी, चमगादड़ और सभी स्तनधारी जीव अक्सर लोगों के बीच, घरों और खेतों के करीब रहते हैं। ये सब एकसाथ मिलकर करीब 70 फीसदी वायरस फैलाते हैं। सार्स, निपाह, मारबर्ग और इबोला जैसी बीमारियां अकेले चमगादड़ों से ही फैल गई थीं।

लंदन की रॉयल सोसाइटी बी की पत्रिका में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार संक्रामक रोग फैलने का सबसे ज्यादा खतरा विलुप्त हो रहे उन जंगली जानवरों से है जिनकी आबादी शिकार, वन्य जीव व्यापार और कम होते जंगलों की वजह से काफी हद तक कम हो गई है।

इस स्टडी में कहा गया है, 'जैव विविधता वाले क्षेत्रों में अतिक्रमण की वजह से मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच नए संपर्क स्थापित हो रहे हैं जिसकी वजह से संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। स्तनधारी जानवरों और चमगादड़ों की कुछ प्रजातियों से पशुजन्य वायरस फैलने की ज्यादा संभावना होती है।

स्टडी की प्रमुख लेखक और वन हेल्थ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर क्रेउडर जॉनसन ने कहा, 'जानवरों से वायरस फैलने की सीधी वजह वन्य जीवों और उनके निवास स्थान से जुड़े हमारे काम हैं। अब परिणाम यह है कि वे अपने वायरस हम तक फैला रहे हैं। ये चीजें जानवरों के अस्तित्व को खतरे में डालने के साथ संक्रमण के भी खतरे को बढ़ा रही हैं।'

क्रेउडर जॉनसन ने कहा, 'ये चीजें दुर्भाग्यपूर्ण हैं और हम अपने लिए कई मुश्किलें पैदा कर रहे हैं। हमें वास्तव में इस चीज को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है कि वन्य जीवों और मनुष्यों के बीच किस तरह से सही तालमेल बिठाया जा सके। जाहिर है कि हम इस तरह की महामारी नहीं चाहते हैं। हमें वन्य जीवों के साथ मिलजुलकर रहने के और तरीके खोजने की जरूरत है, क्योंकि उनके पास वायरस की कोई कमी नहीं है।'

इसके अलावा, दुनिया भर के 200 से अधिक वन्य जीव संगठनों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को पत्र लिखकर कई देशों पर वन्य जीवों के अरबों रुपये के व्यापार को लेकर कई तरह की सावधानी बरतने को कहा है। इसमें सभी जीवित वन्य जीव के बाजारों और पारंपरिक चिकित्सा में इनके इस्तेमाल पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की भी सिफारिश की गई है।

इस पत्र के अनुसार, Covid-19 महामारी, चीन के वेट मार्केट से फैली है जहां हर तरह के पशुओं का मांस मिलता है। जानवरों और लोगों के बीच इतनी करीबी होने की वजह से यह मनुष्यों में फैल गया। इंटरनेशनल वेलफेयर फॉर एनिमल वेलफेयर, जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन और पेटा जैसे समूहों का भी कहना है कि वैश्विक स्तर पर वन्य जीव बाजारों पर प्रतिबंध से कई तरह की बीमारियों को फैलने से रोका जा सकता है। इन संगठनों का कहना है कि इबोला, मेर्स, एचआईवी, ट्यूबरक्लोसिस, रेबीज और लेप्टोस्पायरोसिस जैसे पशुजन्य रोगों से हर साल 2 अरब से ज्यादा लोग बीमार पड़ते हैं और 20 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है।

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Wednesday, 8 April 2020

कोरोना की दवा समझकर पी ली जहरीली शराब, 600 लोगों की दर्दनाक मौत


नई दिल्ली : कोरोना वायरस से बचने के चक्कर में अफवाहों में आकर नीट अल्कोहल (जहरीली शराब) पीने से ईरान में 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों से ईरान में हाहाकार मचा हुआ है। 3000 लोग ऐसे भी हैं जिन्हें देश के विभिन्न अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया है। इनमें से कई की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। माना जा रहा है कि मौत का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।



ईरान सरकार के न्यायिक प्रवक्ता गुलाम हुसैन एस्मेली ने बताया कि शराब का सेवन कोरोना वायरस का इलाज नहीं है। यह मानव शरीर के बहुत ही घातक है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें बिलकुल ही अंदाजा नहीं था कि ऐसी अफवाह से इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाएगी।

ईरान के कई राजनेताओं ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सरकारी न्यूज एसेंजी तस्नीम के अनुसार, इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे हालात से ईरानी सरकार कड़ाई से निपटेगी।

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कोरोना वायरस से पैदा हुए हालात से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से पांच अरब डॉलर के इमरजेंसी फंड देने की मांग की है। रूहानी ने कहा कि मैं अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपील करता हूं कि वो अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कर्ज देने में किसी प्रकार के भेदभाव से बचने की भी अपील की। रूहानी ने अमेरिकी प्रतिबंधों को आर्थिक और मेडिकल आतंकवाद बताया।

मंगलवार को ईरानी संसद की बैठक में बड़ी संख्या में पहुंचे सदस्यों ने देश में पूर्ण रूप से लॉकडाउन न करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि इससे देश में बड़ी संख्या में नौकरियां खत्म होंगी। इसके अलावा देश की उत्पादकता पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि देश में यात्रा प्रतिबंधों के अलावा कई तरह से व्यवसायों को पहले ही बंद किया जा चुका है।

पाठकों को बता दे की ईरान में कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण अबतक 3872 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 62589 लोग अब भी इससे संक्रमित हैं। सरकार ने बड़ी संख्या में लोगों को इलाज के लिए क्वारंटीन सेंटरों में रखा है।


नई दिल्ली : कोरोना वायरस से बचने के चक्कर में अफवाहों में आकर नीट अल्कोहल (जहरीली शराब) पीने से ईरान में 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों से ईरान में हाहाकार मचा हुआ है। 3000 लोग ऐसे भी हैं जिन्हें देश के विभिन्न अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया है। इनमें से कई की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। माना जा रहा है कि मौत का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।



ईरान सरकार के न्यायिक प्रवक्ता गुलाम हुसैन एस्मेली ने बताया कि शराब का सेवन कोरोना वायरस का इलाज नहीं है। यह मानव शरीर के बहुत ही घातक है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें बिलकुल ही अंदाजा नहीं था कि ऐसी अफवाह से इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाएगी।

ईरान के कई राजनेताओं ने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सरकारी न्यूज एसेंजी तस्नीम के अनुसार, इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे हालात से ईरानी सरकार कड़ाई से निपटेगी।

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कोरोना वायरस से पैदा हुए हालात से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से पांच अरब डॉलर के इमरजेंसी फंड देने की मांग की है। रूहानी ने कहा कि मैं अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपील करता हूं कि वो अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कर्ज देने में किसी प्रकार के भेदभाव से बचने की भी अपील की। रूहानी ने अमेरिकी प्रतिबंधों को आर्थिक और मेडिकल आतंकवाद बताया।

मंगलवार को ईरानी संसद की बैठक में बड़ी संख्या में पहुंचे सदस्यों ने देश में पूर्ण रूप से लॉकडाउन न करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि इससे देश में बड़ी संख्या में नौकरियां खत्म होंगी। इसके अलावा देश की उत्पादकता पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि देश में यात्रा प्रतिबंधों के अलावा कई तरह से व्यवसायों को पहले ही बंद किया जा चुका है।

पाठकों को बता दे की ईरान में कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण अबतक 3872 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 62589 लोग अब भी इससे संक्रमित हैं। सरकार ने बड़ी संख्या में लोगों को इलाज के लिए क्वारंटीन सेंटरों में रखा है।

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Sunday, 5 April 2020

निजामुद्दीन मरकज का परमिट 2 फ्लोर का था और बना दी 7 मंजिला इमारत


नई दिल्ली : पुरे हिन्दुस्तान में कोरोना वायरस (Covid-19) के संक्रमण फैलाने का आरोप झेल रहे तबलीगी जमात संगठन पर संकट बढ़ता दिख रहा है। राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में इसका मुख्यालय है। सूत्रों का कहना है कि यहां मरकज की इमारत का निर्माण कार्य नियमों का उल्लंघन कर किया गया था।



इस मामले में दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, मरकज की इमारत दो प्लॉट जोड़कर बनाई गई है। जबकि यह कुल 7 मंजिला इमारत है। जानकारी मिली है कि इस इमारत के सिर्फ दो फ्लोर का नक्शा पास है। साथ ही मरकज की इस इमारत का कभी हाउस टैक्स भी नहीं भरा गया।

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के मुताबिक पहले इस जगह सिर्फ एक मस्जिद थी और उसके बाद यहां पर एक मदरसा बनाया गया। लेकिन बाद में यहां पर तकरीबन 70 फ़ीसदी अवैध निर्माण करके मरकज की इमारत बनाई गई। इन विवादों के बीच जानकारी मिल रही है कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम इस इमारत से संबंधित दस्तावेजों को खंगाल रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस इमारत के अवैध निर्माण को तोड़ने की तमाम कागजी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात मरकज से भागे जमातियों को दिल्ली पुलिस का एक कॉन्स्टेबल बॉर्डर पार कराने की कोशिश कर रहा था। इस कॉन्स्टेबल को भी शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था। बता दें, देश में 21 दिन का लॉकडाउन लागू है। इस बीच निजामुद्दीन इलाके के मरकज में तबलीगी जमात के हजारों लोग इकट्ठा हुए थे। ये देश के अलावा दुनिया के कई अन्य देशों के थे। इन जमातियों में से कई कोरोना वायरस से संक्रमित मिले हैं। जानकारी मिली है कि कई संदिग्ध अभी भी फरार हैं।

तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना मुहम्मद साद कांधलवी को दिल्ली पुलिस ने नोटिस जारी की थी। कांधवली के वकील ने शनिवार को पुलिस के नोटिस का जवाब दिया है। उनके वकील ने जरूरी दस्तावेजों को पेश करने के लिए समय मांगा है, क्योंकि लॉकडाउन के कारण कार्यालय और विभाग बंद है। बता दें, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने तबलीगी जमात के नेता मौलाना साद कांधलवी समेत 7 लोगों को नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में उनके खिलाफ लॉकडाउन के आदेशों का कथित तौर पर उल्लंघन कर धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है।


नई दिल्ली : पुरे हिन्दुस्तान में कोरोना वायरस (Covid-19) के संक्रमण फैलाने का आरोप झेल रहे तबलीगी जमात संगठन पर संकट बढ़ता दिख रहा है। राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में इसका मुख्यालय है। सूत्रों का कहना है कि यहां मरकज की इमारत का निर्माण कार्य नियमों का उल्लंघन कर किया गया था।



इस मामले में दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, मरकज की इमारत दो प्लॉट जोड़कर बनाई गई है। जबकि यह कुल 7 मंजिला इमारत है। जानकारी मिली है कि इस इमारत के सिर्फ दो फ्लोर का नक्शा पास है। साथ ही मरकज की इस इमारत का कभी हाउस टैक्स भी नहीं भरा गया।

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के मुताबिक पहले इस जगह सिर्फ एक मस्जिद थी और उसके बाद यहां पर एक मदरसा बनाया गया। लेकिन बाद में यहां पर तकरीबन 70 फ़ीसदी अवैध निर्माण करके मरकज की इमारत बनाई गई। इन विवादों के बीच जानकारी मिल रही है कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम इस इमारत से संबंधित दस्तावेजों को खंगाल रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस इमारत के अवैध निर्माण को तोड़ने की तमाम कागजी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात मरकज से भागे जमातियों को दिल्ली पुलिस का एक कॉन्स्टेबल बॉर्डर पार कराने की कोशिश कर रहा था। इस कॉन्स्टेबल को भी शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था। बता दें, देश में 21 दिन का लॉकडाउन लागू है। इस बीच निजामुद्दीन इलाके के मरकज में तबलीगी जमात के हजारों लोग इकट्ठा हुए थे। ये देश के अलावा दुनिया के कई अन्य देशों के थे। इन जमातियों में से कई कोरोना वायरस से संक्रमित मिले हैं। जानकारी मिली है कि कई संदिग्ध अभी भी फरार हैं।

तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना मुहम्मद साद कांधलवी को दिल्ली पुलिस ने नोटिस जारी की थी। कांधवली के वकील ने शनिवार को पुलिस के नोटिस का जवाब दिया है। उनके वकील ने जरूरी दस्तावेजों को पेश करने के लिए समय मांगा है, क्योंकि लॉकडाउन के कारण कार्यालय और विभाग बंद है। बता दें, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने तबलीगी जमात के नेता मौलाना साद कांधलवी समेत 7 लोगों को नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में उनके खिलाफ लॉकडाउन के आदेशों का कथित तौर पर उल्लंघन कर धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है।

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Saturday, 18 January 2020

प्राइवेट पार्ट में तंबाकू रख रही हैं महिलाएं, जाने क्यों....?


नई दिल्ली : नशीले पदार्थ के रूप में इस्तेमाल होने वाले तंबाकू का प्रयोग अब सेक्स ड्राइव को बूस्ट करने के लिए भी किया जाने लगा है। डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं द्वारा वेजाइना (गुप्तांग) में तंबाकू रखकर सेक्स ड्राइव को बूस्ट करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। डॉक्टर्स का मानना है कि सेक्स के तलब में ऐसा कर रही महिलाएं अपनी जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।



एक तरफ जहां लोग इसे सेक्स ड्राइव को बूस्ट करने का फॉर्मूला बता रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर चिकित्सकों ने इसे लेकर चेतावनी जारी की है। डॉक्टर्स का कहना है कि ऐसा करने से आप हमेशा के लिए यौन सुख से हाथ धो बैठेंगे। स्मोकिंग प्रोडक्ट के जरिए सेक्स ड्राइव को बूस्ट करना मौत को दावत देने के समान है।

प्रोफेसर पास्कल फॉमेन, 'तंबाकू अल्सर जैसी बीमारियों का कारण बन जाता है, जो योनि को सिकोड़कर, इसे कठोर बनाता है और इसे हमेशा के लिए बंद कर सकता है।' Sci Dev Net की एक रिपोर्ट के मुताबिक तंबाकू सामान्य तौर पर होने वाले मेन्सट्रूएशन को भी प्रभावित करता है। मेन्स्ट्रुएशन पर असर पड़ने की वजह से महिलाओं को गर्भधारण करने में भी दिक्कतें होंगी।

जाइनकोलॉजिस्ट डॉक्टर अब्डुलाये डियोप का कहना है कि ये वेजाइना के सिकुड़ने का भी बड़ा कारण बन सकता है। वेजाइना में तंबाकू रखने वाले पीड़ितों ने महसूस किया है कि उनके गुप्तांग छोटे होते जा रहे हैं क्योंकि उनकी अंतरंग मांसपेशियां पीछे की तरफ खिसकने लगी हैं। डॉक्टर डियोप का कहना है, 'यह भावना क्षणिक और भ्रामक है। ऐसा करना वेजिनल मुकोसा के लिए खतरनाक है जिसके कारण कैंसर जैसी घातक बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।'

इस तरह के ज्यादातर मामले वेस्ट अफ्रीका के देश सेनेगल से सामने आए हैं।  इस देश में कई महिलाएं यौन सुख पाने के लिए अपनी जिंदगी से खिलवाड़ कर रही हैं। सेनेगल में लोगों के बीच ऐसी भ्रांतियां हैं कि 13 पैसे में मिलने वाला तंबाकू आपको सातवें स्वर्ग का एहसास करा सकता है।

बता दें कि यह उत्पाद तंबाकू के सूखे पत्ते, पेड़ों की जड़ों और पौधों के अर्क से प्राप्त होता है। इसके अलावा इसे ज्यादा असरदार बनाने के लिए इसमें सोडा और शिआ बटर जैसे पदार्थ भी मिलाए जाते हैं। इस तरह की सभी चीजों को सेहत के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। ऐसे प्रैक्टिकल तो महिलाओं के स्वास्थ्य को और भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इसका इस्तेमाल करने के बाद महिलाओं को चक्कर आना और जलन होने जैसी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं। वेजाइना में तंबाकू रखकर सेक्स ड्राइट को बूस्ट करने के भ्रम में जीने वाली ऐसी ही महिलाओं से सेनेगल की एक हेल्थ वर्कर ग्निमा न्डियाए बातचीत कर उन्हें इसके खतरों के बारे में बता रही हैं।

ग्निमा न्डियाए पीड़ित महिलाओं से मिलकर उन्हें इसके खतरों के बारे में बता रही हैं और उनसे ऐसा न करने की अपील कर रही हैं। सेनेगल की रहने वाली नेयबा (50) ने बताया कि उनकी एक रिश्तेदार ने उन्हें प्राइवेट पार्ट में तंबाकू रखने की सलाह दी थी। नेयबा लंबे वक्त तक मां नहीं बन सकी थी। तब उनकी एक रिश्तेदार ने उन्हें यह फॉर्मूला बताते हुए कहा था कि ऐसा करने से वह आसानी से प्रेग्नेंट हो जाएगी।

 नेयबा ने बताया कि जब उन्होंने ये फॉर्मूला खुद पर आजमाया तो उन्हें बड़े दर्द से गुजरना पड़ा। नेयबा के पेट में हर वक्त दर्द रहता था। हालांकि दर्द खत्म होने के बाद उन्हें काफी अच्छा महसूस होता था। लेकिन उसे महसूस हो रहा था कि इसका असर उसके शरीर पर पड़ रहा है। ग्निमा न्डियाए ने बताया कि हाल ही में वह एक महिला से मिली थीं जिसे तीन-तीन सर्वाइकल कैंसर थे। उस महिला ने भी तबाकू के इस्तेमाल करने की बात कबूली थी।


नई दिल्ली : नशीले पदार्थ के रूप में इस्तेमाल होने वाले तंबाकू का प्रयोग अब सेक्स ड्राइव को बूस्ट करने के लिए भी किया जाने लगा है। डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं द्वारा वेजाइना (गुप्तांग) में तंबाकू रखकर सेक्स ड्राइव को बूस्ट करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। डॉक्टर्स का मानना है कि सेक्स के तलब में ऐसा कर रही महिलाएं अपनी जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही हैं।



एक तरफ जहां लोग इसे सेक्स ड्राइव को बूस्ट करने का फॉर्मूला बता रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर चिकित्सकों ने इसे लेकर चेतावनी जारी की है। डॉक्टर्स का कहना है कि ऐसा करने से आप हमेशा के लिए यौन सुख से हाथ धो बैठेंगे। स्मोकिंग प्रोडक्ट के जरिए सेक्स ड्राइव को बूस्ट करना मौत को दावत देने के समान है।

प्रोफेसर पास्कल फॉमेन, 'तंबाकू अल्सर जैसी बीमारियों का कारण बन जाता है, जो योनि को सिकोड़कर, इसे कठोर बनाता है और इसे हमेशा के लिए बंद कर सकता है।' Sci Dev Net की एक रिपोर्ट के मुताबिक तंबाकू सामान्य तौर पर होने वाले मेन्सट्रूएशन को भी प्रभावित करता है। मेन्स्ट्रुएशन पर असर पड़ने की वजह से महिलाओं को गर्भधारण करने में भी दिक्कतें होंगी।

जाइनकोलॉजिस्ट डॉक्टर अब्डुलाये डियोप का कहना है कि ये वेजाइना के सिकुड़ने का भी बड़ा कारण बन सकता है। वेजाइना में तंबाकू रखने वाले पीड़ितों ने महसूस किया है कि उनके गुप्तांग छोटे होते जा रहे हैं क्योंकि उनकी अंतरंग मांसपेशियां पीछे की तरफ खिसकने लगी हैं। डॉक्टर डियोप का कहना है, 'यह भावना क्षणिक और भ्रामक है। ऐसा करना वेजिनल मुकोसा के लिए खतरनाक है जिसके कारण कैंसर जैसी घातक बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।'

इस तरह के ज्यादातर मामले वेस्ट अफ्रीका के देश सेनेगल से सामने आए हैं।  इस देश में कई महिलाएं यौन सुख पाने के लिए अपनी जिंदगी से खिलवाड़ कर रही हैं। सेनेगल में लोगों के बीच ऐसी भ्रांतियां हैं कि 13 पैसे में मिलने वाला तंबाकू आपको सातवें स्वर्ग का एहसास करा सकता है।

बता दें कि यह उत्पाद तंबाकू के सूखे पत्ते, पेड़ों की जड़ों और पौधों के अर्क से प्राप्त होता है। इसके अलावा इसे ज्यादा असरदार बनाने के लिए इसमें सोडा और शिआ बटर जैसे पदार्थ भी मिलाए जाते हैं। इस तरह की सभी चीजों को सेहत के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। ऐसे प्रैक्टिकल तो महिलाओं के स्वास्थ्य को और भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इसका इस्तेमाल करने के बाद महिलाओं को चक्कर आना और जलन होने जैसी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं। वेजाइना में तंबाकू रखकर सेक्स ड्राइट को बूस्ट करने के भ्रम में जीने वाली ऐसी ही महिलाओं से सेनेगल की एक हेल्थ वर्कर ग्निमा न्डियाए बातचीत कर उन्हें इसके खतरों के बारे में बता रही हैं।

ग्निमा न्डियाए पीड़ित महिलाओं से मिलकर उन्हें इसके खतरों के बारे में बता रही हैं और उनसे ऐसा न करने की अपील कर रही हैं। सेनेगल की रहने वाली नेयबा (50) ने बताया कि उनकी एक रिश्तेदार ने उन्हें प्राइवेट पार्ट में तंबाकू रखने की सलाह दी थी। नेयबा लंबे वक्त तक मां नहीं बन सकी थी। तब उनकी एक रिश्तेदार ने उन्हें यह फॉर्मूला बताते हुए कहा था कि ऐसा करने से वह आसानी से प्रेग्नेंट हो जाएगी।

 नेयबा ने बताया कि जब उन्होंने ये फॉर्मूला खुद पर आजमाया तो उन्हें बड़े दर्द से गुजरना पड़ा। नेयबा के पेट में हर वक्त दर्द रहता था। हालांकि दर्द खत्म होने के बाद उन्हें काफी अच्छा महसूस होता था। लेकिन उसे महसूस हो रहा था कि इसका असर उसके शरीर पर पड़ रहा है। ग्निमा न्डियाए ने बताया कि हाल ही में वह एक महिला से मिली थीं जिसे तीन-तीन सर्वाइकल कैंसर थे। उस महिला ने भी तबाकू के इस्तेमाल करने की बात कबूली थी।

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Saturday, 9 November 2019

अयोध्या में जीते रामलला, PM मोदी ने कही ये बड़ी बात


नई दिल्ली : अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले (Ram Janmabhoomi Babri Masjid title suit) में आज सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच अपना फैसला सुना रही है। अयोध्या मामले में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले अयोध्या समेत देश भर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। साथ ही यूपी, दिल्ली, बिहार, राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। फैसले के बाद शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाए जाने के मद्देनजर देश के लोगों से शांति बना रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि हम सबको मिलकर सौहार्द बनाए रखना है।



# सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मंदिर के लिए ट्रस्ट बनाने को कहा। साथ ही मुसमलामानों को अयोध्या में उपयुक्त स्थान पर पांच एकड़ का प्लॉट देने का आदेश।

# सुप्रीम कोर्ट बोला- सरकार मुस्लिम को अयोध्या में 5 एकड़ जमीन उपयुक्त स्थान पर देगी

# अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का केस खारिज किया

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम को मस्जिद के लिए वैकल्पिक स्थान पर प्लॉट दिया जाय।

# एएसआई ने इस तथ्य को स्थापित किया कि गिराए गए ढांचे के नीचे मंदिर था : न्यायालय।

# अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबूत है कि बाहरी स्थान पर हिन्दुओं का कब्जा था, इस पर मुस्लिम का कब्जा नहीं था। लेकिन मुस्लिम अंदरूनी भाग में नमाज़ भी करते रहे। बाबर ने मस्जिद ने बनाई थी लेकिन वे कोई सबूत नहीं दे सके कि इस पर उनका कब्जा था और नमाज़ की जाती थी। जबकि यात्रियों के विवरण से पर चलता है कि हिन्दू यहां पूजा करते थे। 1857 में रेलिंग लगने के बाद सुन्नी बोर्ड यह नहीं बता सका कि ये मस्जिद समर्पित थी। 16 दिसंबर 1949 को आखिरी नमाज की गई।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि  'हाईकोर्ट का यह कहा कि दोनों पक्षों का कब्जा था' गलत है उसके सामने बंटवारे का मुकदमा नहीं था। मुस्लिम ये नहीं बता सके कि अंदरुनी भाग में उनका एक्सक्लूसिव कब्जा था। 
# न्यायालय ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों को महज राय बताना एएसआई के प्रति बहुत अन्याय होगा।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबूत है कि बाहरी स्थान पर हिन्दुओं का कब्जा था, इस पर मुस्लिम का कब्जा नहीं था। लेकिन मुस्लिम अंदरूनी भाग में नमाज़ भी करते रहे।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यात्रियों के विवरण को सावधानी से देखने की जरूरत है। वहीं गजट ने  इसके सबूतों  की पुष्टि की है। हालांकि मालिकाना हक आस्था के आधार पर नहीं तय किया जा सकता।

# अयोध्या मामेल पर बोला सुप्रीम कोर्ट: हिन्दुओं की आस्था और विश्वास है कि भगवान राम का जन्म गुंबद के नीचे हुए था। (एएनआई)

#  अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट बोला- ASI की रिपोर्ट में यह निष्कर्ष आया था कि यहां मंदिर था, इसके होने के सबूत हैं।

#  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थल पर ईदगाह का मामला उठाना आफ्टर थॉट है जो मुस्लिम पक्ष द्वारा ए एस आई की रिपोर्ट के बाद उठाया गया।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम जन्मस्थान पर एएसआई की रिपोर्ट मान्य है।

# न्यायालय अब पूजा के अधिकार के लिये गोपाल सिंह विशारद के दावे पर फैसला सुना रहा है। न्यायालय ने कहा कि निर्मोही अखाड़े की याचिका कानूनी समय सीमा के दायरे में नहीं, न ही वह रखरखाव या राम लला के उपासक।

# न्यायालय ने कहा कि राजस्व रिकार्ड के अनुसार विवादित भूमि सरकारी है। - भाषा- अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला पढ़ा जा रहा है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम संतुलन पर चलेंगे। किसी के पक्ष में नहीं जाएंगे।


नई दिल्ली : अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले (Ram Janmabhoomi Babri Masjid title suit) में आज सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच अपना फैसला सुना रही है। अयोध्या मामले में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले अयोध्या समेत देश भर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। साथ ही यूपी, दिल्ली, बिहार, राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। फैसले के बाद शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाए जाने के मद्देनजर देश के लोगों से शांति बना रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि हम सबको मिलकर सौहार्द बनाए रखना है।



# सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मंदिर के लिए ट्रस्ट बनाने को कहा। साथ ही मुसमलामानों को अयोध्या में उपयुक्त स्थान पर पांच एकड़ का प्लॉट देने का आदेश।

# सुप्रीम कोर्ट बोला- सरकार मुस्लिम को अयोध्या में 5 एकड़ जमीन उपयुक्त स्थान पर देगी

# अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का केस खारिज किया

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम को मस्जिद के लिए वैकल्पिक स्थान पर प्लॉट दिया जाय।

# एएसआई ने इस तथ्य को स्थापित किया कि गिराए गए ढांचे के नीचे मंदिर था : न्यायालय।

# अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबूत है कि बाहरी स्थान पर हिन्दुओं का कब्जा था, इस पर मुस्लिम का कब्जा नहीं था। लेकिन मुस्लिम अंदरूनी भाग में नमाज़ भी करते रहे। बाबर ने मस्जिद ने बनाई थी लेकिन वे कोई सबूत नहीं दे सके कि इस पर उनका कब्जा था और नमाज़ की जाती थी। जबकि यात्रियों के विवरण से पर चलता है कि हिन्दू यहां पूजा करते थे। 1857 में रेलिंग लगने के बाद सुन्नी बोर्ड यह नहीं बता सका कि ये मस्जिद समर्पित थी। 16 दिसंबर 1949 को आखिरी नमाज की गई।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि  'हाईकोर्ट का यह कहा कि दोनों पक्षों का कब्जा था' गलत है उसके सामने बंटवारे का मुकदमा नहीं था। मुस्लिम ये नहीं बता सके कि अंदरुनी भाग में उनका एक्सक्लूसिव कब्जा था। 
# न्यायालय ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों को महज राय बताना एएसआई के प्रति बहुत अन्याय होगा।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबूत है कि बाहरी स्थान पर हिन्दुओं का कब्जा था, इस पर मुस्लिम का कब्जा नहीं था। लेकिन मुस्लिम अंदरूनी भाग में नमाज़ भी करते रहे।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यात्रियों के विवरण को सावधानी से देखने की जरूरत है। वहीं गजट ने  इसके सबूतों  की पुष्टि की है। हालांकि मालिकाना हक आस्था के आधार पर नहीं तय किया जा सकता।

# अयोध्या मामेल पर बोला सुप्रीम कोर्ट: हिन्दुओं की आस्था और विश्वास है कि भगवान राम का जन्म गुंबद के नीचे हुए था। (एएनआई)

#  अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट बोला- ASI की रिपोर्ट में यह निष्कर्ष आया था कि यहां मंदिर था, इसके होने के सबूत हैं।

#  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थल पर ईदगाह का मामला उठाना आफ्टर थॉट है जो मुस्लिम पक्ष द्वारा ए एस आई की रिपोर्ट के बाद उठाया गया।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम जन्मस्थान पर एएसआई की रिपोर्ट मान्य है।

# न्यायालय अब पूजा के अधिकार के लिये गोपाल सिंह विशारद के दावे पर फैसला सुना रहा है। न्यायालय ने कहा कि निर्मोही अखाड़े की याचिका कानूनी समय सीमा के दायरे में नहीं, न ही वह रखरखाव या राम लला के उपासक।

# न्यायालय ने कहा कि राजस्व रिकार्ड के अनुसार विवादित भूमि सरकारी है। - भाषा- अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला पढ़ा जा रहा है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम संतुलन पर चलेंगे। किसी के पक्ष में नहीं जाएंगे।

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Monday, 30 September 2019

गायों ने कर दिया किसानों को मालामाल, दूध से महंगा गौमूत्र, विदेशों में भी बढ़ी मांग


नई दिल्ली : गाय को लेकर राजस्थान में हमेशा से ही राजनीति होती रही है। पिछले चार-पांच सालों में गौ-तस्करी और गौ-सरंक्षण का मुद्दा प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उठा है। इसी बीच अब गौ उत्पादों की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। गौ संरक्षण और गौ उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने अलग से गोपालन निदेशालय बनाने के बाद अब गौमूत्र के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है।



राज्य की प्रमुख गौशालाओं के गौमूत्र के दाम में अचानक दो से तीन गुना तक तेजी आई है। हालात यह हो गए कि गौमूत्र दूध से अधिक महंगा बिक रहा है। गौमूत्र और इससे बनने वाली औषधियां बाजार में खूब बिक रही है। विदेशों में भी इनकी मांग बढ़ी है।

प्रदेश की प्रमुख गौशालाओं का गौमूत्र 135 से 140 रूपए प्रति लीटर बिक रहा है,जबकि दूध की कीमत 45 से 52 रूपए प्रति किलो है। गौमूत्र के सेवन में लोगों की दिलचस्पी इतनी बढ़ी है। राज्य के बड़े शहरों में गौ उत्पादों में दुकानें बड़े शौरूम की तरह खुल गई हैं। इनमें सबसे अधिक मांग गौमूत्र की है।

पथमेड़ा गौशाला, जयपुर की दुर्गापुरा गौशाला और नागौर की श्रीकृष्ण गोपाल गौशाला से तो गौमूत्र विदेशों में भी भेजा जा रहा है। गौशाला प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। गौमूत्र के साथ ही दुकानों पर डायबीटीज, पेट और मोटापा कम करने की औषधियां भी गौ उत्पादों से बन रही है। गौशालाओं में सुबह-सुबह 5 से 6 बजे के बीच बड़ी संख्या में लोग हाथ में गिलास या कटोरी लेकर ताजा गौमूत्र पीने के लिए पहुंचते है।

पथमेड़ा गौशाला के सेवक रामकृष्ण का कहना है कि देशी गाय के गौमूत्र से कई रोगों का इलाज स्वत: ही हो जाता है। योगाचार्य ढाकाराम का कहना है कि गौमूत्र अमृत की तरह होता है। निरोगी काया के लिए इससे उत्तम अन्य कोई औषधी नहीं है।

जयपुर में दुर्गापुरा गौशाला में काम करने वाले लोगों ने बताया कि गौमूत्र का उपयोग अन्य कई कार्यो में किया जाता है। कुछ लोग खाना पकाने में पानी के स्थान पर गौमूत्र का उपयोग कर रहे हैं। इस गौशाला से प्रतिदिन करीब दो हजार लीटर गौमूत्र तैयार हो रहा है। इस गौमूत्र को गर्म करने के बाद अमोनिया निकालकर पैक करके बाजार में बेचा जा रहा है। यहां का गौमूत्र स्थानीय मार्केट के अलावा विदेशों में भी बिकने के लिए जा रहा है।

राज्य में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव नरेश पाल गंगवार का कहना है कि गौमूत्र की बिक्री के साथ ही गाय पालने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। गाय के दूध के साथ ही गौमूत्र और इससे बनने वाली औषधियों की डिमांड भी बढ़ी है। नागौर की श्रीकृष्ण गौशाला और एशिया की सबसे बड़ी पथमेड़ा गौशाला ने आसपास के किसानों को गौमूत्र के माध्यम से रोजगार दे रखा है। किसान गौमूत्र इकठ्ठा करके इन गौशालाओं में बेचते है। इसके बाद गौशाला मार्केट में बेचती है ।

राज्य के गौपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बताया कि राज्य में करीब चार हजार गौशालाएं हैं। इनमें से 1363 गौशालाएं गोपालन विभाग में पंजीकृत हैं। पंजीकृत गौशालाओं को सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि गौसंरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार गौ उत्पादों की बिक्री बढ़ाने को लेकर भी जागरूकता अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि गौशालाओं का पंजीकण बढ़ाने को लेकर अधिकारियों से कहा गया है।


नई दिल्ली : गाय को लेकर राजस्थान में हमेशा से ही राजनीति होती रही है। पिछले चार-पांच सालों में गौ-तस्करी और गौ-सरंक्षण का मुद्दा प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उठा है। इसी बीच अब गौ उत्पादों की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। गौ संरक्षण और गौ उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने अलग से गोपालन निदेशालय बनाने के बाद अब गौमूत्र के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है।



राज्य की प्रमुख गौशालाओं के गौमूत्र के दाम में अचानक दो से तीन गुना तक तेजी आई है। हालात यह हो गए कि गौमूत्र दूध से अधिक महंगा बिक रहा है। गौमूत्र और इससे बनने वाली औषधियां बाजार में खूब बिक रही है। विदेशों में भी इनकी मांग बढ़ी है।

प्रदेश की प्रमुख गौशालाओं का गौमूत्र 135 से 140 रूपए प्रति लीटर बिक रहा है,जबकि दूध की कीमत 45 से 52 रूपए प्रति किलो है। गौमूत्र के सेवन में लोगों की दिलचस्पी इतनी बढ़ी है। राज्य के बड़े शहरों में गौ उत्पादों में दुकानें बड़े शौरूम की तरह खुल गई हैं। इनमें सबसे अधिक मांग गौमूत्र की है।

पथमेड़ा गौशाला, जयपुर की दुर्गापुरा गौशाला और नागौर की श्रीकृष्ण गोपाल गौशाला से तो गौमूत्र विदेशों में भी भेजा जा रहा है। गौशाला प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। गौमूत्र के साथ ही दुकानों पर डायबीटीज, पेट और मोटापा कम करने की औषधियां भी गौ उत्पादों से बन रही है। गौशालाओं में सुबह-सुबह 5 से 6 बजे के बीच बड़ी संख्या में लोग हाथ में गिलास या कटोरी लेकर ताजा गौमूत्र पीने के लिए पहुंचते है।

पथमेड़ा गौशाला के सेवक रामकृष्ण का कहना है कि देशी गाय के गौमूत्र से कई रोगों का इलाज स्वत: ही हो जाता है। योगाचार्य ढाकाराम का कहना है कि गौमूत्र अमृत की तरह होता है। निरोगी काया के लिए इससे उत्तम अन्य कोई औषधी नहीं है।

जयपुर में दुर्गापुरा गौशाला में काम करने वाले लोगों ने बताया कि गौमूत्र का उपयोग अन्य कई कार्यो में किया जाता है। कुछ लोग खाना पकाने में पानी के स्थान पर गौमूत्र का उपयोग कर रहे हैं। इस गौशाला से प्रतिदिन करीब दो हजार लीटर गौमूत्र तैयार हो रहा है। इस गौमूत्र को गर्म करने के बाद अमोनिया निकालकर पैक करके बाजार में बेचा जा रहा है। यहां का गौमूत्र स्थानीय मार्केट के अलावा विदेशों में भी बिकने के लिए जा रहा है।

राज्य में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव नरेश पाल गंगवार का कहना है कि गौमूत्र की बिक्री के साथ ही गाय पालने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। गाय के दूध के साथ ही गौमूत्र और इससे बनने वाली औषधियों की डिमांड भी बढ़ी है। नागौर की श्रीकृष्ण गौशाला और एशिया की सबसे बड़ी पथमेड़ा गौशाला ने आसपास के किसानों को गौमूत्र के माध्यम से रोजगार दे रखा है। किसान गौमूत्र इकठ्ठा करके इन गौशालाओं में बेचते है। इसके बाद गौशाला मार्केट में बेचती है ।

राज्य के गौपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बताया कि राज्य में करीब चार हजार गौशालाएं हैं। इनमें से 1363 गौशालाएं गोपालन विभाग में पंजीकृत हैं। पंजीकृत गौशालाओं को सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि गौसंरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार गौ उत्पादों की बिक्री बढ़ाने को लेकर भी जागरूकता अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि गौशालाओं का पंजीकण बढ़ाने को लेकर अधिकारियों से कहा गया है।

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Sunday, 22 September 2019

कैब ड्राइवर के पास नहीं था कॉन्डम तो कट गया चालान, पढ़िए.....


नई दिल्ली : नया मोटर व्‍हीकल एक्‍ट (New Motor Vehicle Act) लागू होने के बाद भारी-भरकम जुर्माने के कई मामले सामने आए। हालांकि कुछ ऐसे अजीबो-गरीब मामले भी सामने आए हैं जो सोशल मीडिया (Social Media) पर काफी छाए हुए हैं। अभी ताजा मामला दिल्‍ली के एक कैब (Cab) ड्राइवर का सामने आया है जिसका चालान कॉन्‍डम न रखने के चलते काट दिया गया।



टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, हाल में एक कैब ड्राइवर का इसलिए चालान काट दिया गया क्योंकि उसकी कैब में रखे फर्स्ट ऐड बॉक्स में कॉन्डम नहीं था। दरअसल, फर्स्ट ऐड बॉक्स में कॉन्डम रखने को लेकर कोई नियम नहीं है, लेकिन कैब ड्राइवर का मानना है कि चालान से बचने के लिए कॉन्‍डम रखना अनिवार्य है।

खबर के अनुसार, दिल्ली के नेल्सन मंडेला मार्ग पर धर्मेंद को दो दिन पहले एक ट्रैफिक पुलिस वाले ने रोक लिया था। उसके पास सारे कागजात मौजूद थे लेकिन जब उसका फर्स्ट ऐड बॉक्स देखा गया तो उसमे कॉन्डम नहीं था। इस बात पर ट्रैफिक पुलिस ने ड्राइवर का चालान काट दिया। बताया जाता है कि उसको जब चालान की रसीद मिली तो उसमें कॉन्डम का जिक्र न करते हुए ओवर स्पीड बताया गया।

दिल्ली की सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलजीत गिल ने बताया कि सार्वजनिक वाहनों के लिए हर समय कम से कम तीन कॉन्डम लेकर चलना जरूरी है। हालांकि ज्यादातर कैब ड्राइवरों को इस बात की खबर नहीं है कि आखिर उन्हें कॉन्डम रखना क्यों जरूरी है। कमलजीत गिल बताते हैं कि इसका इस्तेमाल चोट लगने पर किया जाता है। कॉन्डम किसी भी हादसे के समय खून के प्रवाह को रोकने में काफी मददगार साबित होता है।

दिल्ली की सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलजीत गिल बताते हैं कि किसी तरह का हादसा होने पर, हड्डी में चोट लगने पर या फिर किसी भी तरह का कट लगने पर कॉन्डम का इस्तेमाल किया जा सकता है। बताते हैं कि अगर किसी को चोट लगने पर खून बहता है तो इसे कॉन्डम के जरिए रोका जा सकता है। इसी तरह फ्रैक्चर होने पर भी उस जगह पर अस्पताल पहुंचने तक कॉन्डम बांधा जा सकता है।

ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, इस तरह का कोई नियम नहीं बना है। फिटनेस टेस्ट के दौरान भी इस तरह के मामले पर कोई जांच नहीं की जाती है। पुलिस ने तो यहां तक कह दिया कि अगर कॉन्डम न रखने पर किसी कैब ड्राइवर का चालान होता है तो उसे इसकी शिकायत अथॉरिटी से करनी चाहिए। बता दें कि दिल्ली मोटर व्‍हीकल एक्‍ट- 1993 और सेंट्रल मोटर व्‍हीकल एक्‍ट, 1989 में भी इसका कोई जिक्र नहीं है।


नई दिल्ली : नया मोटर व्‍हीकल एक्‍ट (New Motor Vehicle Act) लागू होने के बाद भारी-भरकम जुर्माने के कई मामले सामने आए। हालांकि कुछ ऐसे अजीबो-गरीब मामले भी सामने आए हैं जो सोशल मीडिया (Social Media) पर काफी छाए हुए हैं। अभी ताजा मामला दिल्‍ली के एक कैब (Cab) ड्राइवर का सामने आया है जिसका चालान कॉन्‍डम न रखने के चलते काट दिया गया।



टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, हाल में एक कैब ड्राइवर का इसलिए चालान काट दिया गया क्योंकि उसकी कैब में रखे फर्स्ट ऐड बॉक्स में कॉन्डम नहीं था। दरअसल, फर्स्ट ऐड बॉक्स में कॉन्डम रखने को लेकर कोई नियम नहीं है, लेकिन कैब ड्राइवर का मानना है कि चालान से बचने के लिए कॉन्‍डम रखना अनिवार्य है।

खबर के अनुसार, दिल्ली के नेल्सन मंडेला मार्ग पर धर्मेंद को दो दिन पहले एक ट्रैफिक पुलिस वाले ने रोक लिया था। उसके पास सारे कागजात मौजूद थे लेकिन जब उसका फर्स्ट ऐड बॉक्स देखा गया तो उसमे कॉन्डम नहीं था। इस बात पर ट्रैफिक पुलिस ने ड्राइवर का चालान काट दिया। बताया जाता है कि उसको जब चालान की रसीद मिली तो उसमें कॉन्डम का जिक्र न करते हुए ओवर स्पीड बताया गया।

दिल्ली की सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलजीत गिल ने बताया कि सार्वजनिक वाहनों के लिए हर समय कम से कम तीन कॉन्डम लेकर चलना जरूरी है। हालांकि ज्यादातर कैब ड्राइवरों को इस बात की खबर नहीं है कि आखिर उन्हें कॉन्डम रखना क्यों जरूरी है। कमलजीत गिल बताते हैं कि इसका इस्तेमाल चोट लगने पर किया जाता है। कॉन्डम किसी भी हादसे के समय खून के प्रवाह को रोकने में काफी मददगार साबित होता है।

दिल्ली की सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलजीत गिल बताते हैं कि किसी तरह का हादसा होने पर, हड्डी में चोट लगने पर या फिर किसी भी तरह का कट लगने पर कॉन्डम का इस्तेमाल किया जा सकता है। बताते हैं कि अगर किसी को चोट लगने पर खून बहता है तो इसे कॉन्डम के जरिए रोका जा सकता है। इसी तरह फ्रैक्चर होने पर भी उस जगह पर अस्पताल पहुंचने तक कॉन्डम बांधा जा सकता है।

ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, इस तरह का कोई नियम नहीं बना है। फिटनेस टेस्ट के दौरान भी इस तरह के मामले पर कोई जांच नहीं की जाती है। पुलिस ने तो यहां तक कह दिया कि अगर कॉन्डम न रखने पर किसी कैब ड्राइवर का चालान होता है तो उसे इसकी शिकायत अथॉरिटी से करनी चाहिए। बता दें कि दिल्ली मोटर व्‍हीकल एक्‍ट- 1993 और सेंट्रल मोटर व्‍हीकल एक्‍ट, 1989 में भी इसका कोई जिक्र नहीं है।

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