Saturday, 9 November 2019

अयोध्या में जीते रामलला, PM मोदी ने कही ये बड़ी बात


नई दिल्ली : अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले (Ram Janmabhoomi Babri Masjid title suit) में आज सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच अपना फैसला सुना रही है। अयोध्या मामले में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले अयोध्या समेत देश भर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। साथ ही यूपी, दिल्ली, बिहार, राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। फैसले के बाद शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाए जाने के मद्देनजर देश के लोगों से शांति बना रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि हम सबको मिलकर सौहार्द बनाए रखना है।



# सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मंदिर के लिए ट्रस्ट बनाने को कहा। साथ ही मुसमलामानों को अयोध्या में उपयुक्त स्थान पर पांच एकड़ का प्लॉट देने का आदेश।

# सुप्रीम कोर्ट बोला- सरकार मुस्लिम को अयोध्या में 5 एकड़ जमीन उपयुक्त स्थान पर देगी

# अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का केस खारिज किया

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम को मस्जिद के लिए वैकल्पिक स्थान पर प्लॉट दिया जाय।

# एएसआई ने इस तथ्य को स्थापित किया कि गिराए गए ढांचे के नीचे मंदिर था : न्यायालय।

# अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबूत है कि बाहरी स्थान पर हिन्दुओं का कब्जा था, इस पर मुस्लिम का कब्जा नहीं था। लेकिन मुस्लिम अंदरूनी भाग में नमाज़ भी करते रहे। बाबर ने मस्जिद ने बनाई थी लेकिन वे कोई सबूत नहीं दे सके कि इस पर उनका कब्जा था और नमाज़ की जाती थी। जबकि यात्रियों के विवरण से पर चलता है कि हिन्दू यहां पूजा करते थे। 1857 में रेलिंग लगने के बाद सुन्नी बोर्ड यह नहीं बता सका कि ये मस्जिद समर्पित थी। 16 दिसंबर 1949 को आखिरी नमाज की गई।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि  'हाईकोर्ट का यह कहा कि दोनों पक्षों का कब्जा था' गलत है उसके सामने बंटवारे का मुकदमा नहीं था। मुस्लिम ये नहीं बता सके कि अंदरुनी भाग में उनका एक्सक्लूसिव कब्जा था। 
# न्यायालय ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों को महज राय बताना एएसआई के प्रति बहुत अन्याय होगा।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबूत है कि बाहरी स्थान पर हिन्दुओं का कब्जा था, इस पर मुस्लिम का कब्जा नहीं था। लेकिन मुस्लिम अंदरूनी भाग में नमाज़ भी करते रहे।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यात्रियों के विवरण को सावधानी से देखने की जरूरत है। वहीं गजट ने  इसके सबूतों  की पुष्टि की है। हालांकि मालिकाना हक आस्था के आधार पर नहीं तय किया जा सकता।

# अयोध्या मामेल पर बोला सुप्रीम कोर्ट: हिन्दुओं की आस्था और विश्वास है कि भगवान राम का जन्म गुंबद के नीचे हुए था। (एएनआई)

#  अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट बोला- ASI की रिपोर्ट में यह निष्कर्ष आया था कि यहां मंदिर था, इसके होने के सबूत हैं।

#  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थल पर ईदगाह का मामला उठाना आफ्टर थॉट है जो मुस्लिम पक्ष द्वारा ए एस आई की रिपोर्ट के बाद उठाया गया।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम जन्मस्थान पर एएसआई की रिपोर्ट मान्य है।

# न्यायालय अब पूजा के अधिकार के लिये गोपाल सिंह विशारद के दावे पर फैसला सुना रहा है। न्यायालय ने कहा कि निर्मोही अखाड़े की याचिका कानूनी समय सीमा के दायरे में नहीं, न ही वह रखरखाव या राम लला के उपासक।

# न्यायालय ने कहा कि राजस्व रिकार्ड के अनुसार विवादित भूमि सरकारी है। - भाषा- अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला पढ़ा जा रहा है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम संतुलन पर चलेंगे। किसी के पक्ष में नहीं जाएंगे।


नई दिल्ली : अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले (Ram Janmabhoomi Babri Masjid title suit) में आज सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच अपना फैसला सुना रही है। अयोध्या मामले में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले अयोध्या समेत देश भर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। साथ ही यूपी, दिल्ली, बिहार, राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। फैसले के बाद शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाए जाने के मद्देनजर देश के लोगों से शांति बना रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि हम सबको मिलकर सौहार्द बनाए रखना है।



# सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मंदिर के लिए ट्रस्ट बनाने को कहा। साथ ही मुसमलामानों को अयोध्या में उपयुक्त स्थान पर पांच एकड़ का प्लॉट देने का आदेश।

# सुप्रीम कोर्ट बोला- सरकार मुस्लिम को अयोध्या में 5 एकड़ जमीन उपयुक्त स्थान पर देगी

# अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का केस खारिज किया

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम को मस्जिद के लिए वैकल्पिक स्थान पर प्लॉट दिया जाय।

# एएसआई ने इस तथ्य को स्थापित किया कि गिराए गए ढांचे के नीचे मंदिर था : न्यायालय।

# अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबूत है कि बाहरी स्थान पर हिन्दुओं का कब्जा था, इस पर मुस्लिम का कब्जा नहीं था। लेकिन मुस्लिम अंदरूनी भाग में नमाज़ भी करते रहे। बाबर ने मस्जिद ने बनाई थी लेकिन वे कोई सबूत नहीं दे सके कि इस पर उनका कब्जा था और नमाज़ की जाती थी। जबकि यात्रियों के विवरण से पर चलता है कि हिन्दू यहां पूजा करते थे। 1857 में रेलिंग लगने के बाद सुन्नी बोर्ड यह नहीं बता सका कि ये मस्जिद समर्पित थी। 16 दिसंबर 1949 को आखिरी नमाज की गई।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि  'हाईकोर्ट का यह कहा कि दोनों पक्षों का कब्जा था' गलत है उसके सामने बंटवारे का मुकदमा नहीं था। मुस्लिम ये नहीं बता सके कि अंदरुनी भाग में उनका एक्सक्लूसिव कब्जा था। 
# न्यायालय ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों को महज राय बताना एएसआई के प्रति बहुत अन्याय होगा।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सबूत है कि बाहरी स्थान पर हिन्दुओं का कब्जा था, इस पर मुस्लिम का कब्जा नहीं था। लेकिन मुस्लिम अंदरूनी भाग में नमाज़ भी करते रहे।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यात्रियों के विवरण को सावधानी से देखने की जरूरत है। वहीं गजट ने  इसके सबूतों  की पुष्टि की है। हालांकि मालिकाना हक आस्था के आधार पर नहीं तय किया जा सकता।

# अयोध्या मामेल पर बोला सुप्रीम कोर्ट: हिन्दुओं की आस्था और विश्वास है कि भगवान राम का जन्म गुंबद के नीचे हुए था। (एएनआई)

#  अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट बोला- ASI की रिपोर्ट में यह निष्कर्ष आया था कि यहां मंदिर था, इसके होने के सबूत हैं।

#  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थल पर ईदगाह का मामला उठाना आफ्टर थॉट है जो मुस्लिम पक्ष द्वारा ए एस आई की रिपोर्ट के बाद उठाया गया।

# सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम जन्मस्थान पर एएसआई की रिपोर्ट मान्य है।

# न्यायालय अब पूजा के अधिकार के लिये गोपाल सिंह विशारद के दावे पर फैसला सुना रहा है। न्यायालय ने कहा कि निर्मोही अखाड़े की याचिका कानूनी समय सीमा के दायरे में नहीं, न ही वह रखरखाव या राम लला के उपासक।

# न्यायालय ने कहा कि राजस्व रिकार्ड के अनुसार विवादित भूमि सरकारी है। - भाषा- अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला पढ़ा जा रहा है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम संतुलन पर चलेंगे। किसी के पक्ष में नहीं जाएंगे।

Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

Read This :

loading...

Monday, 30 September 2019

गायों ने कर दिया किसानों को मालामाल, दूध से महंगा गौमूत्र, विदेशों में भी बढ़ी मांग


नई दिल्ली : गाय को लेकर राजस्थान में हमेशा से ही राजनीति होती रही है। पिछले चार-पांच सालों में गौ-तस्करी और गौ-सरंक्षण का मुद्दा प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उठा है। इसी बीच अब गौ उत्पादों की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। गौ संरक्षण और गौ उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने अलग से गोपालन निदेशालय बनाने के बाद अब गौमूत्र के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है।



राज्य की प्रमुख गौशालाओं के गौमूत्र के दाम में अचानक दो से तीन गुना तक तेजी आई है। हालात यह हो गए कि गौमूत्र दूध से अधिक महंगा बिक रहा है। गौमूत्र और इससे बनने वाली औषधियां बाजार में खूब बिक रही है। विदेशों में भी इनकी मांग बढ़ी है।

प्रदेश की प्रमुख गौशालाओं का गौमूत्र 135 से 140 रूपए प्रति लीटर बिक रहा है,जबकि दूध की कीमत 45 से 52 रूपए प्रति किलो है। गौमूत्र के सेवन में लोगों की दिलचस्पी इतनी बढ़ी है। राज्य के बड़े शहरों में गौ उत्पादों में दुकानें बड़े शौरूम की तरह खुल गई हैं। इनमें सबसे अधिक मांग गौमूत्र की है।

पथमेड़ा गौशाला, जयपुर की दुर्गापुरा गौशाला और नागौर की श्रीकृष्ण गोपाल गौशाला से तो गौमूत्र विदेशों में भी भेजा जा रहा है। गौशाला प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। गौमूत्र के साथ ही दुकानों पर डायबीटीज, पेट और मोटापा कम करने की औषधियां भी गौ उत्पादों से बन रही है। गौशालाओं में सुबह-सुबह 5 से 6 बजे के बीच बड़ी संख्या में लोग हाथ में गिलास या कटोरी लेकर ताजा गौमूत्र पीने के लिए पहुंचते है।

पथमेड़ा गौशाला के सेवक रामकृष्ण का कहना है कि देशी गाय के गौमूत्र से कई रोगों का इलाज स्वत: ही हो जाता है। योगाचार्य ढाकाराम का कहना है कि गौमूत्र अमृत की तरह होता है। निरोगी काया के लिए इससे उत्तम अन्य कोई औषधी नहीं है।

जयपुर में दुर्गापुरा गौशाला में काम करने वाले लोगों ने बताया कि गौमूत्र का उपयोग अन्य कई कार्यो में किया जाता है। कुछ लोग खाना पकाने में पानी के स्थान पर गौमूत्र का उपयोग कर रहे हैं। इस गौशाला से प्रतिदिन करीब दो हजार लीटर गौमूत्र तैयार हो रहा है। इस गौमूत्र को गर्म करने के बाद अमोनिया निकालकर पैक करके बाजार में बेचा जा रहा है। यहां का गौमूत्र स्थानीय मार्केट के अलावा विदेशों में भी बिकने के लिए जा रहा है।

राज्य में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव नरेश पाल गंगवार का कहना है कि गौमूत्र की बिक्री के साथ ही गाय पालने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। गाय के दूध के साथ ही गौमूत्र और इससे बनने वाली औषधियों की डिमांड भी बढ़ी है। नागौर की श्रीकृष्ण गौशाला और एशिया की सबसे बड़ी पथमेड़ा गौशाला ने आसपास के किसानों को गौमूत्र के माध्यम से रोजगार दे रखा है। किसान गौमूत्र इकठ्ठा करके इन गौशालाओं में बेचते है। इसके बाद गौशाला मार्केट में बेचती है ।

राज्य के गौपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बताया कि राज्य में करीब चार हजार गौशालाएं हैं। इनमें से 1363 गौशालाएं गोपालन विभाग में पंजीकृत हैं। पंजीकृत गौशालाओं को सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि गौसंरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार गौ उत्पादों की बिक्री बढ़ाने को लेकर भी जागरूकता अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि गौशालाओं का पंजीकण बढ़ाने को लेकर अधिकारियों से कहा गया है।


नई दिल्ली : गाय को लेकर राजस्थान में हमेशा से ही राजनीति होती रही है। पिछले चार-पांच सालों में गौ-तस्करी और गौ-सरंक्षण का मुद्दा प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उठा है। इसी बीच अब गौ उत्पादों की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। गौ संरक्षण और गौ उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने अलग से गोपालन निदेशालय बनाने के बाद अब गौमूत्र के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है।



राज्य की प्रमुख गौशालाओं के गौमूत्र के दाम में अचानक दो से तीन गुना तक तेजी आई है। हालात यह हो गए कि गौमूत्र दूध से अधिक महंगा बिक रहा है। गौमूत्र और इससे बनने वाली औषधियां बाजार में खूब बिक रही है। विदेशों में भी इनकी मांग बढ़ी है।

प्रदेश की प्रमुख गौशालाओं का गौमूत्र 135 से 140 रूपए प्रति लीटर बिक रहा है,जबकि दूध की कीमत 45 से 52 रूपए प्रति किलो है। गौमूत्र के सेवन में लोगों की दिलचस्पी इतनी बढ़ी है। राज्य के बड़े शहरों में गौ उत्पादों में दुकानें बड़े शौरूम की तरह खुल गई हैं। इनमें सबसे अधिक मांग गौमूत्र की है।

पथमेड़ा गौशाला, जयपुर की दुर्गापुरा गौशाला और नागौर की श्रीकृष्ण गोपाल गौशाला से तो गौमूत्र विदेशों में भी भेजा जा रहा है। गौशाला प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। गौमूत्र के साथ ही दुकानों पर डायबीटीज, पेट और मोटापा कम करने की औषधियां भी गौ उत्पादों से बन रही है। गौशालाओं में सुबह-सुबह 5 से 6 बजे के बीच बड़ी संख्या में लोग हाथ में गिलास या कटोरी लेकर ताजा गौमूत्र पीने के लिए पहुंचते है।

पथमेड़ा गौशाला के सेवक रामकृष्ण का कहना है कि देशी गाय के गौमूत्र से कई रोगों का इलाज स्वत: ही हो जाता है। योगाचार्य ढाकाराम का कहना है कि गौमूत्र अमृत की तरह होता है। निरोगी काया के लिए इससे उत्तम अन्य कोई औषधी नहीं है।

जयपुर में दुर्गापुरा गौशाला में काम करने वाले लोगों ने बताया कि गौमूत्र का उपयोग अन्य कई कार्यो में किया जाता है। कुछ लोग खाना पकाने में पानी के स्थान पर गौमूत्र का उपयोग कर रहे हैं। इस गौशाला से प्रतिदिन करीब दो हजार लीटर गौमूत्र तैयार हो रहा है। इस गौमूत्र को गर्म करने के बाद अमोनिया निकालकर पैक करके बाजार में बेचा जा रहा है। यहां का गौमूत्र स्थानीय मार्केट के अलावा विदेशों में भी बिकने के लिए जा रहा है।

राज्य में कृषि विभाग के प्रमुख सचिव नरेश पाल गंगवार का कहना है कि गौमूत्र की बिक्री के साथ ही गाय पालने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। गाय के दूध के साथ ही गौमूत्र और इससे बनने वाली औषधियों की डिमांड भी बढ़ी है। नागौर की श्रीकृष्ण गौशाला और एशिया की सबसे बड़ी पथमेड़ा गौशाला ने आसपास के किसानों को गौमूत्र के माध्यम से रोजगार दे रखा है। किसान गौमूत्र इकठ्ठा करके इन गौशालाओं में बेचते है। इसके बाद गौशाला मार्केट में बेचती है ।

राज्य के गौपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बताया कि राज्य में करीब चार हजार गौशालाएं हैं। इनमें से 1363 गौशालाएं गोपालन विभाग में पंजीकृत हैं। पंजीकृत गौशालाओं को सरकार द्वारा अनुदान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि गौसंरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार गौ उत्पादों की बिक्री बढ़ाने को लेकर भी जागरूकता अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि गौशालाओं का पंजीकण बढ़ाने को लेकर अधिकारियों से कहा गया है।

Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

Read This :

loading...

Sunday, 22 September 2019

कैब ड्राइवर के पास नहीं था कॉन्डम तो कट गया चालान, पढ़िए.....


नई दिल्ली : नया मोटर व्‍हीकल एक्‍ट (New Motor Vehicle Act) लागू होने के बाद भारी-भरकम जुर्माने के कई मामले सामने आए। हालांकि कुछ ऐसे अजीबो-गरीब मामले भी सामने आए हैं जो सोशल मीडिया (Social Media) पर काफी छाए हुए हैं। अभी ताजा मामला दिल्‍ली के एक कैब (Cab) ड्राइवर का सामने आया है जिसका चालान कॉन्‍डम न रखने के चलते काट दिया गया।



टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, हाल में एक कैब ड्राइवर का इसलिए चालान काट दिया गया क्योंकि उसकी कैब में रखे फर्स्ट ऐड बॉक्स में कॉन्डम नहीं था। दरअसल, फर्स्ट ऐड बॉक्स में कॉन्डम रखने को लेकर कोई नियम नहीं है, लेकिन कैब ड्राइवर का मानना है कि चालान से बचने के लिए कॉन्‍डम रखना अनिवार्य है।

खबर के अनुसार, दिल्ली के नेल्सन मंडेला मार्ग पर धर्मेंद को दो दिन पहले एक ट्रैफिक पुलिस वाले ने रोक लिया था। उसके पास सारे कागजात मौजूद थे लेकिन जब उसका फर्स्ट ऐड बॉक्स देखा गया तो उसमे कॉन्डम नहीं था। इस बात पर ट्रैफिक पुलिस ने ड्राइवर का चालान काट दिया। बताया जाता है कि उसको जब चालान की रसीद मिली तो उसमें कॉन्डम का जिक्र न करते हुए ओवर स्पीड बताया गया।

दिल्ली की सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलजीत गिल ने बताया कि सार्वजनिक वाहनों के लिए हर समय कम से कम तीन कॉन्डम लेकर चलना जरूरी है। हालांकि ज्यादातर कैब ड्राइवरों को इस बात की खबर नहीं है कि आखिर उन्हें कॉन्डम रखना क्यों जरूरी है। कमलजीत गिल बताते हैं कि इसका इस्तेमाल चोट लगने पर किया जाता है। कॉन्डम किसी भी हादसे के समय खून के प्रवाह को रोकने में काफी मददगार साबित होता है।

दिल्ली की सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलजीत गिल बताते हैं कि किसी तरह का हादसा होने पर, हड्डी में चोट लगने पर या फिर किसी भी तरह का कट लगने पर कॉन्डम का इस्तेमाल किया जा सकता है। बताते हैं कि अगर किसी को चोट लगने पर खून बहता है तो इसे कॉन्डम के जरिए रोका जा सकता है। इसी तरह फ्रैक्चर होने पर भी उस जगह पर अस्पताल पहुंचने तक कॉन्डम बांधा जा सकता है।

ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, इस तरह का कोई नियम नहीं बना है। फिटनेस टेस्ट के दौरान भी इस तरह के मामले पर कोई जांच नहीं की जाती है। पुलिस ने तो यहां तक कह दिया कि अगर कॉन्डम न रखने पर किसी कैब ड्राइवर का चालान होता है तो उसे इसकी शिकायत अथॉरिटी से करनी चाहिए। बता दें कि दिल्ली मोटर व्‍हीकल एक्‍ट- 1993 और सेंट्रल मोटर व्‍हीकल एक्‍ट, 1989 में भी इसका कोई जिक्र नहीं है।


नई दिल्ली : नया मोटर व्‍हीकल एक्‍ट (New Motor Vehicle Act) लागू होने के बाद भारी-भरकम जुर्माने के कई मामले सामने आए। हालांकि कुछ ऐसे अजीबो-गरीब मामले भी सामने आए हैं जो सोशल मीडिया (Social Media) पर काफी छाए हुए हैं। अभी ताजा मामला दिल्‍ली के एक कैब (Cab) ड्राइवर का सामने आया है जिसका चालान कॉन्‍डम न रखने के चलते काट दिया गया।



टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, हाल में एक कैब ड्राइवर का इसलिए चालान काट दिया गया क्योंकि उसकी कैब में रखे फर्स्ट ऐड बॉक्स में कॉन्डम नहीं था। दरअसल, फर्स्ट ऐड बॉक्स में कॉन्डम रखने को लेकर कोई नियम नहीं है, लेकिन कैब ड्राइवर का मानना है कि चालान से बचने के लिए कॉन्‍डम रखना अनिवार्य है।

खबर के अनुसार, दिल्ली के नेल्सन मंडेला मार्ग पर धर्मेंद को दो दिन पहले एक ट्रैफिक पुलिस वाले ने रोक लिया था। उसके पास सारे कागजात मौजूद थे लेकिन जब उसका फर्स्ट ऐड बॉक्स देखा गया तो उसमे कॉन्डम नहीं था। इस बात पर ट्रैफिक पुलिस ने ड्राइवर का चालान काट दिया। बताया जाता है कि उसको जब चालान की रसीद मिली तो उसमें कॉन्डम का जिक्र न करते हुए ओवर स्पीड बताया गया।

दिल्ली की सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलजीत गिल ने बताया कि सार्वजनिक वाहनों के लिए हर समय कम से कम तीन कॉन्डम लेकर चलना जरूरी है। हालांकि ज्यादातर कैब ड्राइवरों को इस बात की खबर नहीं है कि आखिर उन्हें कॉन्डम रखना क्यों जरूरी है। कमलजीत गिल बताते हैं कि इसका इस्तेमाल चोट लगने पर किया जाता है। कॉन्डम किसी भी हादसे के समय खून के प्रवाह को रोकने में काफी मददगार साबित होता है।

दिल्ली की सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलजीत गिल बताते हैं कि किसी तरह का हादसा होने पर, हड्डी में चोट लगने पर या फिर किसी भी तरह का कट लगने पर कॉन्डम का इस्तेमाल किया जा सकता है। बताते हैं कि अगर किसी को चोट लगने पर खून बहता है तो इसे कॉन्डम के जरिए रोका जा सकता है। इसी तरह फ्रैक्चर होने पर भी उस जगह पर अस्पताल पहुंचने तक कॉन्डम बांधा जा सकता है।

ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, इस तरह का कोई नियम नहीं बना है। फिटनेस टेस्ट के दौरान भी इस तरह के मामले पर कोई जांच नहीं की जाती है। पुलिस ने तो यहां तक कह दिया कि अगर कॉन्डम न रखने पर किसी कैब ड्राइवर का चालान होता है तो उसे इसकी शिकायत अथॉरिटी से करनी चाहिए। बता दें कि दिल्ली मोटर व्‍हीकल एक्‍ट- 1993 और सेंट्रल मोटर व्‍हीकल एक्‍ट, 1989 में भी इसका कोई जिक्र नहीं है।

Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

Read This :

loading...

Tuesday, 17 September 2019

आपत्त‍िजनक हालत में द‍िखा प्रेमी जोड़ा तो काटे बाल, प‍िलाया पेशाब, देखें....


नई दिल्ली : राजस्थान में एक मह‍िला और पुरुष को आपत्त‍िजनक हालत में पकड़े जाने पर पंचायत ने तुगलकी फरमान सुना द‍िया। दोनों के बाल काट द‍िए और पुरुष को सबके सामने पेशाब पीने पर मजबूर क‍िया गया। इस घटना का वीड‍ियो क‍िसी ने र‍िकॉर्ड कर ल‍िया और दो द‍िन बाद यह वीड‍ियो तेजी से वायरल हो गया। यह बर्बरतापूर्वक घटना राजस्थान के नागौर ज‍िले की है।



नागौर जिले के लाडनू तहसील के निंबी जोधा गांव में कालबेलिया समाज के एक पुरुष व महिला के साथ बर्बरता का वीडियो सामने आया है जिसमें एक महिला व पुरुष को बेरहमी से पीटा जा रहा है। साथ ही दोनों के बाल काट कर मुंह काला किया जा रहा है।  इतना ही नहीं पुरुष को बोतल से पेशाब पिलाया जा रहा है।

वीडियो नागौर जिले के निंबी जोधा का है। वीडियो की पुष्टि होने पर एसपी डॉ। विकास पाठक व ASP नीतिश आर्य, निंबी जोधा पहुंचे और इस पूरे मामले को गम्भीरता से लेते हुए वीड‍ियो में दिखाई दे रहे लोगों की शिनाख्त कर उन्हें पूछताछ के लिए सोमवार को पुलिस चौकी लाया गया। यह वीडियो 2 दिन पुराना बताया जा रहा है। इस पूरे मामले में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है लेकिन अमानवीय घटना होने के कारण पुलिस ने खुद संज्ञान लेकर इसकी जांच शुरू कर दी है।

इधर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे इस वीडियो में एक महिला और एक पुरुष के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट करते हुए लोग नजर आ रहे हैं। वीडियो में महिला व पुरुष के एक युवक बाल काटते हुए नजर आ रहा है। इस दौरान पुरुष को एक बोतल में भरकर पेशाब भी पिलाया गया।

इसमें यह सामने आया है कि एक पुरुष व महिला को प्रेम प्रसंग के चलते आपत्तिजनक हालत में रंगे हाथ पकड़ लिया गया। इसके बाद कालबेलिया समाज के पंचों द्वारा तुगलकी फरमान सुनाते हुए सजा का ऐलान किया गया जिसके बाद वहां के लोगों ने महिला और पुरुष को मौके पर बैठा लिया। दोनों के बाल काट द‍िए और पुरुष का मुंह काला कर दिया।  इसके बाद उसे एक बोतल में भरकर पेशाब पिलाया गया। वहीं, महिला के साथ मारपीट भी की गई।

वीडियो में यह भी नजर आ रहा है कि इस दौरान वहां खड़े महिला व पुरुष तमाशा देख रहे हैं। कालबेलिया समाज के ही किसी युवक ने अपने मोबाइल में यह सारा मामला कैद कर लिया। बाद में यह वीडियो वायरल होने लगा और आग की तरह चारों ओर फैल गया जिसके बाद नागौर पुलिस अधीक्षक डॉ. विकास पाठक के पास भी पहुंचा।  इसके बाद खुद SP ने वीडियो की पुष्टि करने के बाद मौके पर पहुंच कर पूरे मामले की जानकारी ली। इस पूरे मामले में पूछताछ की जा रही है। नागौर एसपी का कहना है कि इसे गंभीर मामला मानते हुए दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


नई दिल्ली : राजस्थान में एक मह‍िला और पुरुष को आपत्त‍िजनक हालत में पकड़े जाने पर पंचायत ने तुगलकी फरमान सुना द‍िया। दोनों के बाल काट द‍िए और पुरुष को सबके सामने पेशाब पीने पर मजबूर क‍िया गया। इस घटना का वीड‍ियो क‍िसी ने र‍िकॉर्ड कर ल‍िया और दो द‍िन बाद यह वीड‍ियो तेजी से वायरल हो गया। यह बर्बरतापूर्वक घटना राजस्थान के नागौर ज‍िले की है।



नागौर जिले के लाडनू तहसील के निंबी जोधा गांव में कालबेलिया समाज के एक पुरुष व महिला के साथ बर्बरता का वीडियो सामने आया है जिसमें एक महिला व पुरुष को बेरहमी से पीटा जा रहा है। साथ ही दोनों के बाल काट कर मुंह काला किया जा रहा है।  इतना ही नहीं पुरुष को बोतल से पेशाब पिलाया जा रहा है।

वीडियो नागौर जिले के निंबी जोधा का है। वीडियो की पुष्टि होने पर एसपी डॉ। विकास पाठक व ASP नीतिश आर्य, निंबी जोधा पहुंचे और इस पूरे मामले को गम्भीरता से लेते हुए वीड‍ियो में दिखाई दे रहे लोगों की शिनाख्त कर उन्हें पूछताछ के लिए सोमवार को पुलिस चौकी लाया गया। यह वीडियो 2 दिन पुराना बताया जा रहा है। इस पूरे मामले में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है लेकिन अमानवीय घटना होने के कारण पुलिस ने खुद संज्ञान लेकर इसकी जांच शुरू कर दी है।

इधर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे इस वीडियो में एक महिला और एक पुरुष के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट करते हुए लोग नजर आ रहे हैं। वीडियो में महिला व पुरुष के एक युवक बाल काटते हुए नजर आ रहा है। इस दौरान पुरुष को एक बोतल में भरकर पेशाब भी पिलाया गया।

इसमें यह सामने आया है कि एक पुरुष व महिला को प्रेम प्रसंग के चलते आपत्तिजनक हालत में रंगे हाथ पकड़ लिया गया। इसके बाद कालबेलिया समाज के पंचों द्वारा तुगलकी फरमान सुनाते हुए सजा का ऐलान किया गया जिसके बाद वहां के लोगों ने महिला और पुरुष को मौके पर बैठा लिया। दोनों के बाल काट द‍िए और पुरुष का मुंह काला कर दिया।  इसके बाद उसे एक बोतल में भरकर पेशाब पिलाया गया। वहीं, महिला के साथ मारपीट भी की गई।

वीडियो में यह भी नजर आ रहा है कि इस दौरान वहां खड़े महिला व पुरुष तमाशा देख रहे हैं। कालबेलिया समाज के ही किसी युवक ने अपने मोबाइल में यह सारा मामला कैद कर लिया। बाद में यह वीडियो वायरल होने लगा और आग की तरह चारों ओर फैल गया जिसके बाद नागौर पुलिस अधीक्षक डॉ. विकास पाठक के पास भी पहुंचा।  इसके बाद खुद SP ने वीडियो की पुष्टि करने के बाद मौके पर पहुंच कर पूरे मामले की जानकारी ली। इस पूरे मामले में पूछताछ की जा रही है। नागौर एसपी का कहना है कि इसे गंभीर मामला मानते हुए दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

Read This :

loading...

इस शख्स से पाकिस्तान में खौफ के साए में जी रही हैं हिंदू लड़कियां, जानिए....


नई दिल्ली : पाकिस्तान (Pakistan) के सिंध प्रांत (Sindh Province) के घोटकी जिले में हिंदू खौफ के साए में जी रहे हैं। यहां रहने वाले हिंदुओं को दंगों और हमलों का डर सता रहा है। ऐसा पाकिस्तान के सिंध (Sindh) में एक हिंदू शिक्षक (Hindu Teacher) को भीड़ के द्वारा पीटे जाने का मामला सामने आने के बाद हुआ है और मंदिर मे तोड़फोड़ भी की गयी है। हिंदू शिक्षक पर एक छात्र ने धर्म को लेकर विवादित टिप्पणी करने का झूठा आरोप लगाया था।



इसके बाद से ही हिंदू समुदाय (Hindu Community) के लोगों को घरों के भीतर रहने के लिए कहा गया है। मंदिर के बाद अब लोगों के घरों में जबरन घुसकर तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। दरअसल, सिंध प्रांत में पुलिस ने सोमवार को 218 दंगाइयों के खिलाफ मंदिर सहित संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को लेकर तीन मामले दर्ज किए। इससे पहले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय (Minority Hindu Community) के एक स्कूल प्राचार्य के खिलाफ ईश-निंदा के आरोप में मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद ये दंगा भड़का।

दंगे के बाद भीड़ ने इस मामले में हिंदू परिवारों पर हमला भी किया और रोड जाम की। एक पाकिस्तानी वेबसाइट के मुताबिक इस मामले में दंगो करने वाले में धार्मिक नेता मियां मिट्ठू (Mian Mithoo) के समर्थक शामिल थे जिस पर सिंध में बड़े पैमाने पर हिंदू महिलाओ के जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों में शामिल होने का आरोप लगता रहा है।

मियां मिट्ठू  (Mian Mithoo) का पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों में खौफ है। जो इस्लाम अपनाने के लिए तैयार नहीं होता उसे ये मियां मिट्ठू किडनैप करवा लेता है। मियां मिट्ठू (Mian Mithoo) पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का सदस्य है और उसकी पार्टी के सदस्यों के निशाने पर सबसे ज्यादा हिंदू लड़कियां होती हैं। मियां मिट्ठू  (Mian Mithoo) का असली नाम पीर अब्दुल हक आका है। पाकिस्तान के हिंदुओं ने विवादों में रह चुके मियां मिट्ठू का कई बार विरोध किया है। मजे की बात यह है कि राइटविंग एक्टिविस्ट भी इसका विरोध कर चुके हैं।

कुछ दिन पहले पाकिस्तानी हिंदुओं ने इसके खिलाफ प्रदर्शन भी किए थे। लोगों की मांग थी कि मियां मिट्ठू (Mian Mithoo) को गिरफ्तार किया जाए। लाहौर के फैजल स्क्वायर पर कई बार उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। उसके खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन अल्पसंख्यक दिवस को भी हुआ। धर्म परिवर्तन के एक मामले में हाल ही में मियां मिट्ठू (Mian Mithoo) का नाम सामने आया था। उसके ऊपर एक हिंदू महिला की किडनैपिंग का आरोप था।

पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान के कराची में हिंदुओं पर अटैक बढ़े हैं। इसमें 6 अगस्त को हुए एक हिंदू डॉक्टर के मर्डर की घटना भी शामिल है। मियां मिट्ठू (Mian Mithoo) के ऊपर लंबे वक्त से यह आरोप लगता रहा है कि वह पहले मासूम लड़कियों को किडनैप करता है। जिसके बाद उनका धर्म परिवर्तन कराता है और फिर किसी मुस्लिम व्यक्ति से उनकी जबरन शादी करा देता है।


नई दिल्ली : पाकिस्तान (Pakistan) के सिंध प्रांत (Sindh Province) के घोटकी जिले में हिंदू खौफ के साए में जी रहे हैं। यहां रहने वाले हिंदुओं को दंगों और हमलों का डर सता रहा है। ऐसा पाकिस्तान के सिंध (Sindh) में एक हिंदू शिक्षक (Hindu Teacher) को भीड़ के द्वारा पीटे जाने का मामला सामने आने के बाद हुआ है और मंदिर मे तोड़फोड़ भी की गयी है। हिंदू शिक्षक पर एक छात्र ने धर्म को लेकर विवादित टिप्पणी करने का झूठा आरोप लगाया था।



इसके बाद से ही हिंदू समुदाय (Hindu Community) के लोगों को घरों के भीतर रहने के लिए कहा गया है। मंदिर के बाद अब लोगों के घरों में जबरन घुसकर तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। दरअसल, सिंध प्रांत में पुलिस ने सोमवार को 218 दंगाइयों के खिलाफ मंदिर सहित संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को लेकर तीन मामले दर्ज किए। इससे पहले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय (Minority Hindu Community) के एक स्कूल प्राचार्य के खिलाफ ईश-निंदा के आरोप में मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद ये दंगा भड़का।

दंगे के बाद भीड़ ने इस मामले में हिंदू परिवारों पर हमला भी किया और रोड जाम की। एक पाकिस्तानी वेबसाइट के मुताबिक इस मामले में दंगो करने वाले में धार्मिक नेता मियां मिट्ठू (Mian Mithoo) के समर्थक शामिल थे जिस पर सिंध में बड़े पैमाने पर हिंदू महिलाओ के जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों में शामिल होने का आरोप लगता रहा है।

मियां मिट्ठू  (Mian Mithoo) का पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों में खौफ है। जो इस्लाम अपनाने के लिए तैयार नहीं होता उसे ये मियां मिट्ठू किडनैप करवा लेता है। मियां मिट्ठू (Mian Mithoo) पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का सदस्य है और उसकी पार्टी के सदस्यों के निशाने पर सबसे ज्यादा हिंदू लड़कियां होती हैं। मियां मिट्ठू  (Mian Mithoo) का असली नाम पीर अब्दुल हक आका है। पाकिस्तान के हिंदुओं ने विवादों में रह चुके मियां मिट्ठू का कई बार विरोध किया है। मजे की बात यह है कि राइटविंग एक्टिविस्ट भी इसका विरोध कर चुके हैं।

कुछ दिन पहले पाकिस्तानी हिंदुओं ने इसके खिलाफ प्रदर्शन भी किए थे। लोगों की मांग थी कि मियां मिट्ठू (Mian Mithoo) को गिरफ्तार किया जाए। लाहौर के फैजल स्क्वायर पर कई बार उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। उसके खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन अल्पसंख्यक दिवस को भी हुआ। धर्म परिवर्तन के एक मामले में हाल ही में मियां मिट्ठू (Mian Mithoo) का नाम सामने आया था। उसके ऊपर एक हिंदू महिला की किडनैपिंग का आरोप था।

पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान के कराची में हिंदुओं पर अटैक बढ़े हैं। इसमें 6 अगस्त को हुए एक हिंदू डॉक्टर के मर्डर की घटना भी शामिल है। मियां मिट्ठू (Mian Mithoo) के ऊपर लंबे वक्त से यह आरोप लगता रहा है कि वह पहले मासूम लड़कियों को किडनैप करता है। जिसके बाद उनका धर्म परिवर्तन कराता है और फिर किसी मुस्लिम व्यक्ति से उनकी जबरन शादी करा देता है।

Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

Read This :

loading...

Thursday, 12 September 2019

लैंडर विक्रम को लेकर नया खुलासा, संपर्क टूटने का ग्राफ में दिखा सबूत !


नई दिल्ली : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का महत्वकांक्षी मून मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) को लेकर नया खुलासा हुआ है। लैंडर विक्रम (Lander Vikram) का इसरो से संपर्क चंद्रमा की सतह से 21 किमी ऊंचाई पर नहीं, बल्कि 335 मीटर ऊंचाई पर टूटा था। इसरो के मिशन ऑपरेशन कॉम्पलेक्स (MOX) की स्क्रीन पर जारी तस्वीर से इस बात का खुलासा हुआ है।



दरअसल, जिस समय चंद्रयान-2 Chandrayaan-2) का विक्रम (Lander Vikram) लैंडिंग कर रहा था, उसकी डिटेल इसरो (ISRO) के मिशन ऑपरेशन कॉम्पलेक्स (MOX) पर एक ग्राफ के रूप में दिखाई दे रही थी। ग्राफ में तीन रेखाएं दिखाई दे रही थी। जिनमें से बीच वाली लाल रेखा पर विक्रम लैंडर चल रहा था। यह रेखा लैंडर विक्रम के लिए वैज्ञानिकों द्वारा तय किया गया पूर्व निर्धारित पथ था। जबकि विक्रम की रियल टाइम का पथ हरे रंग की रेखा में दिखाई दे रहा था।

सब कुछ ठीक ही चल रहा था। तभी चंद्रमा की सतह से 4.2 किमी की ऊंचाई पर लैंडर विक्रम अपने पूर्व निर्धारित पथ से थोड़ा भटका, लेकिन जल्द ही उसे ठीक कर दिया गया। इसके बाद जब विक्रम चंद्रमा की सतह से 2.1 किमी की दूरी पर पहुंचा तो वह अपने रास्ते से भटक कर अलग दिशा में चलने लगा। इस समय उसकी चांद की सतह की ओर आने की 59 मीटर प्रति सेकंड (यानी 212 किमी/सेकंड) रफ्तार थी। 400 मीटर की ऊंचाई तक आते-आते विक्रम की स्पीड लगभग उस स्तर पर पहुंच चुकी थी, जिस स्पीड से उसे सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी।

चंद्रमा की सतह से 335 मीटर दूरी पर टूटा संपर्क :-

मिशन ऑपरेशन कॉम्पलेक्स (MOX) की स्क्रीन पर ग्राफ में दिखाई दे रहा कि विक्रम को 400 मीटर से 10 मीटर की ऊंचाई तक 1 या 2 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से नीचे लाया जाता। फिर आखिरी में इसकी गति को जीरो कर सॉफ्ट लैंडिंग कराई जाती। लेकिन लैंडिंग के लिए निर्धारित आखिरी 15 मिनट के 13वें मिनट में स्क्रीन पर एक हरे धब्बे के साथ सब कुछ रुक गया। उस समय लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह से 335 मीटर ऊंचाई पर था।


नई दिल्ली : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का महत्वकांक्षी मून मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) को लेकर नया खुलासा हुआ है। लैंडर विक्रम (Lander Vikram) का इसरो से संपर्क चंद्रमा की सतह से 21 किमी ऊंचाई पर नहीं, बल्कि 335 मीटर ऊंचाई पर टूटा था। इसरो के मिशन ऑपरेशन कॉम्पलेक्स (MOX) की स्क्रीन पर जारी तस्वीर से इस बात का खुलासा हुआ है।



दरअसल, जिस समय चंद्रयान-2 Chandrayaan-2) का विक्रम (Lander Vikram) लैंडिंग कर रहा था, उसकी डिटेल इसरो (ISRO) के मिशन ऑपरेशन कॉम्पलेक्स (MOX) पर एक ग्राफ के रूप में दिखाई दे रही थी। ग्राफ में तीन रेखाएं दिखाई दे रही थी। जिनमें से बीच वाली लाल रेखा पर विक्रम लैंडर चल रहा था। यह रेखा लैंडर विक्रम के लिए वैज्ञानिकों द्वारा तय किया गया पूर्व निर्धारित पथ था। जबकि विक्रम की रियल टाइम का पथ हरे रंग की रेखा में दिखाई दे रहा था।

सब कुछ ठीक ही चल रहा था। तभी चंद्रमा की सतह से 4.2 किमी की ऊंचाई पर लैंडर विक्रम अपने पूर्व निर्धारित पथ से थोड़ा भटका, लेकिन जल्द ही उसे ठीक कर दिया गया। इसके बाद जब विक्रम चंद्रमा की सतह से 2.1 किमी की दूरी पर पहुंचा तो वह अपने रास्ते से भटक कर अलग दिशा में चलने लगा। इस समय उसकी चांद की सतह की ओर आने की 59 मीटर प्रति सेकंड (यानी 212 किमी/सेकंड) रफ्तार थी। 400 मीटर की ऊंचाई तक आते-आते विक्रम की स्पीड लगभग उस स्तर पर पहुंच चुकी थी, जिस स्पीड से उसे सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी।

चंद्रमा की सतह से 335 मीटर दूरी पर टूटा संपर्क :-

मिशन ऑपरेशन कॉम्पलेक्स (MOX) की स्क्रीन पर ग्राफ में दिखाई दे रहा कि विक्रम को 400 मीटर से 10 मीटर की ऊंचाई तक 1 या 2 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से नीचे लाया जाता। फिर आखिरी में इसकी गति को जीरो कर सॉफ्ट लैंडिंग कराई जाती। लेकिन लैंडिंग के लिए निर्धारित आखिरी 15 मिनट के 13वें मिनट में स्क्रीन पर एक हरे धब्बे के साथ सब कुछ रुक गया। उस समय लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह से 335 मीटर ऊंचाई पर था।


Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

Read This :

loading...

Sunday, 8 September 2019

विक्रम लैंडर से संपर्क टूटने से दुखी देशवासियों को अब ISRO ने दी ये नई खुशखबर


नई दिल्ली : विक्रम लैंडर से संपर्क टूटने से दुखी देशवासियों को इसरो ने नई सूचना से खुश कर दिया है। उसका कहना है कि चंद्रयान-2 के सटीक प्रक्षेपण और मिशन प्रबंधन की वजह से चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा ऑर्बिटर सात वर्ष तक काम करता रहेगा। पहले की गई गणना में इसकी उम्र एक वर्ष आंकी जा रही थी। साथ ही इसरो ने मिशन को 90 से 95 प्रतिशत तक सफल बताया है।



चंद्रयान-2 एक प्रकार से 3-इन-1 मिशन था। इसमें ऑर्बिटर के साथ लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान भी भेजे गए थे। एक ही मिशन से इसरो का प्रयास चंद्रमा की सतह, सतह से नीचे और बर्हिमंडल, तीनों पर शोध करना था।

ऑर्बिटर 20 अगस्त 2019 को ही चंद्रमा की कक्षा में सफलता से दाखिल होकर करीब 120 किमी ऊंचाई पर परिक्रमा कर रहा है और बर्हिमंडल व सतह की तस्वीरें भी भेज चुका है। इसरो के अनुसार ऑर्बिटर में 0.3 मीटर रिजोल्यूशन का अत्याधुनिक कैमरा लगा है, जो अब तक किसी भी चंद्र मिशन में नहीं लगाया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार इसके जरिये चंद्रमा की सतह पर मौजूद एक फीट जितनी बड़ी वस्तु की भी तस्वीर ली जा सकती है। इसरो ने चंद्रयान-2 को बेहद जटिल मिशन बताया और कहा कि यह इसरो के अब तक के सभी मिशन में तकनीकी तौर पर बहुत आगे है। यही वजह है कि 22 जुलाई के प्रक्षेपण के बाद से पूरी दुनिया इसकी प्रगति देख रही है और काफी अपेक्षाएं रखती है।

मिशन से क्या होगा फायदा :-

ऑर्बिटर अब अगले कुछ समय में चंद्रमा के विकास पर हमारी समझ को बढ़ाएगा। इसके नक्शे तैयार करेगा, खनिजों का आकलन करेगा और चंद्रमा के ध्रुवों पर पानी की संभावना तलाशेगा। इसके लिए इसमें आठ वैज्ञानिक उपकरण लगाए गए हैं।

इसलिए 95 प्रतिशत सफल :-

विक्रम लैंडर चंद्रमा के आकाश में 35 किमी की ऊंचाई से 2 किमी की ऊंचाई तक योजना के अनुसार तय अपने प्रक्षेप पथ पर चला। उसके सभी सिस्टम व सेंसर पूरी तरह ठीक रहे। सफलता के लिए तय हर एक चरण के मानकों के अनुसार मिशन ने अब तक 90 से 95 प्रतिशत उद्देश्य पूरे किए हैं। लैंडर से संपर्क टूटने के बावजूद ऑर्बिटर से हमें चंद्रमा को लेकर काफी जानकारियां व डाटा मिलता रहेगा।


नई दिल्ली : विक्रम लैंडर से संपर्क टूटने से दुखी देशवासियों को इसरो ने नई सूचना से खुश कर दिया है। उसका कहना है कि चंद्रयान-2 के सटीक प्रक्षेपण और मिशन प्रबंधन की वजह से चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा ऑर्बिटर सात वर्ष तक काम करता रहेगा। पहले की गई गणना में इसकी उम्र एक वर्ष आंकी जा रही थी। साथ ही इसरो ने मिशन को 90 से 95 प्रतिशत तक सफल बताया है।



चंद्रयान-2 एक प्रकार से 3-इन-1 मिशन था। इसमें ऑर्बिटर के साथ लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान भी भेजे गए थे। एक ही मिशन से इसरो का प्रयास चंद्रमा की सतह, सतह से नीचे और बर्हिमंडल, तीनों पर शोध करना था।

ऑर्बिटर 20 अगस्त 2019 को ही चंद्रमा की कक्षा में सफलता से दाखिल होकर करीब 120 किमी ऊंचाई पर परिक्रमा कर रहा है और बर्हिमंडल व सतह की तस्वीरें भी भेज चुका है। इसरो के अनुसार ऑर्बिटर में 0.3 मीटर रिजोल्यूशन का अत्याधुनिक कैमरा लगा है, जो अब तक किसी भी चंद्र मिशन में नहीं लगाया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार इसके जरिये चंद्रमा की सतह पर मौजूद एक फीट जितनी बड़ी वस्तु की भी तस्वीर ली जा सकती है। इसरो ने चंद्रयान-2 को बेहद जटिल मिशन बताया और कहा कि यह इसरो के अब तक के सभी मिशन में तकनीकी तौर पर बहुत आगे है। यही वजह है कि 22 जुलाई के प्रक्षेपण के बाद से पूरी दुनिया इसकी प्रगति देख रही है और काफी अपेक्षाएं रखती है।

मिशन से क्या होगा फायदा :-

ऑर्बिटर अब अगले कुछ समय में चंद्रमा के विकास पर हमारी समझ को बढ़ाएगा। इसके नक्शे तैयार करेगा, खनिजों का आकलन करेगा और चंद्रमा के ध्रुवों पर पानी की संभावना तलाशेगा। इसके लिए इसमें आठ वैज्ञानिक उपकरण लगाए गए हैं।

इसलिए 95 प्रतिशत सफल :-

विक्रम लैंडर चंद्रमा के आकाश में 35 किमी की ऊंचाई से 2 किमी की ऊंचाई तक योजना के अनुसार तय अपने प्रक्षेप पथ पर चला। उसके सभी सिस्टम व सेंसर पूरी तरह ठीक रहे। सफलता के लिए तय हर एक चरण के मानकों के अनुसार मिशन ने अब तक 90 से 95 प्रतिशत उद्देश्य पूरे किए हैं। लैंडर से संपर्क टूटने के बावजूद ऑर्बिटर से हमें चंद्रमा को लेकर काफी जानकारियां व डाटा मिलता रहेगा।

Source : rajsthan patrika, samaya live, ndtv, news18 hindi, navbharat times, jagran, nai dunia, live hindustan, jansatta

Read This :

loading...

Propller Push

© 2011-2014 Hamari Khabar. Designed by Bloggertheme9. Powered by Blogger.